Russia-Ukraine War: यूक्रेन और रूस के बीच चल रही जंग में अब तीसरे देश नॉर्थ कोरिया की भी एंट्री हो गई है. यूक्रेन के जापोरिझिझिया शहर पर रूसी हमले में कुछ ऐसी मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया, जिसने कहर ही ढा दिया है. इससे भयानक नुकसान होने की खबरें सामने आई हैं और खुद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि ये रूसी मिसाइलें नहीं हैं. तो आखिर पुतिन की सेना को ये हथियार दे कौन रहा है?
90 फीसदी बजट सिर्फ हथियारों में ही खर्च
इसके जवाब में नाम आता है धरती के सबसे रहस्यमयी देश नॉर्थ कोरिया का. ये तो सब जानते हैं कि इस देश का लगभग 90 फीसदी बजट सिर्फ और सिर्फ हथियारों में ही खर्च होता है या यूं कहें कि कोई जानता ही नहीं है कि किम जोंग उन के देश का बजट है कितना और कहां से ये हथियार बन रहे हैं. उत्तर कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल होने की पुष्टि हुई है. राष्ट्रपति जेलेंस्की के मुताबिक शहर पर नॉर्थ कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइलें, जिरकॉन और ग्लाइड बम गिराए गए.
छह लोग मारे गए और 19 घायल
इस हमले में छह लोग मारे गए और 19 घायल हुए. कीव, खेरसॉन, खार्किव समेत अन्य क्षेत्रों में भी मिसाइल और ड्रोन हमले हुए, जिनमें 120 से ज्यादा शाहेद ड्रोन शामिल थे. यूक्रेनी खुफिया और पश्चिमी आकलन के अनुसार, रूस को उत्तर कोरिया से बड़े पैमाने पर सैन्य सहायता मिल रही है. रूस के पास उत्तर कोरिया की सबसे महत्वपूर्ण बैलिस्टिक मिसाइलें KN-23 (ह्वासोंग-11A) और KN-24 (ह्वासोंग-11B) हैं. ये ठोस ईंधन वाली, सड़क-मोबाइल शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें हैं और रूसी इस्कंदर-एम से मिलती-जुलती हैं.
एयर डिफेंस को चुनौती
इनकी रेंज करीब 600-900 किलोमीटर है और ये कम ऊंचाई पर उड़कर एयर डिफेंस को चुनौती देती हैं. साल 2023 के अंत से अगस्त 2025 तक रूस को करीब 150 ऐसी मिसाइलें मिलीं. हाल ही में रूस को ऐसी 40 और मिसाइलें भेजी गईं. यूक्रेनी खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस वोरोनेज क्षेत्र में उत्तर कोरियाई मिसाइल यूनिट तैनात कर रहा है, जिसमें करीब 90 कर्मी, 6 लॉन्चर और 120 मिसाइलें हो सकती हैं. इनमें से कई पहले ही यूक्रेन पर दागी जा चुकी हैं.
सटीकता भी बेहतर हुई
रूसी मदद से इनकी सटीकता भी बेहतर हुई है. इसके अलावा, उत्तर कोरिया ने लाखों आर्टिलरी शेल (अनुमान 80 लाख से 1.5 करोड़ राउंड), 200 से ज्यादा आर्टिलरी सिस्टम (170 मिमी गन और 240 मिमी रॉकेट लॉन्चर) और एंटी-टैंक मिसाइलें भी दी हैं. कुछ आकलन में ये रूस की आर्टिलरी जरूरत का 25-40 प्रतिशत या उससे ज्यादा पूरा करती हैं.
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