Russia Ukraine War: यूक्रेन के हमलों ने रूस में भारी तबाही मचाई है, और अब यह बात खुद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी मानने लगे हैं. रूसी राष्ट्रपति ने माना है कि यूक्रेन के हमलों की वजह से देश में तेल की कमी हो रही है. ऐसे में वह बातचीत के लिए भी तैयार नजर आ रहें हैं. राष्ट्रपति पुतिन एक इंटरव्यू में ये बात कही.
बता दें कि यूक्रेन द्वारा पिछले चार साल से चल रहे युद्ध के वजह से रूस में तेल और गैस की ये स्थिति उत्पन्न हुई है. वहीं, यूक्रेन ने रूस के तेल-गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपने हमले को जायज ठहरा रहा है. उसने कहा है कि ये हमले रूस द्वारा फरवरी 2022 में युद्ध शुरू करने के बाद से यूक्रेन के आम लोगों और उसके ऊर्जा ढांचे पर लगभग हर दिन किए जाने वाले हमलों का जवाब हैं.
पुतिन ने क्या कहा?
रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन ने कहा कि “जहां तक महत्वपूर्ण ढांचे पर हमलों की बात है, खासकर ऊर्जा ढांचे पर, तो हमारी सुविधाओं पर हुए इन हमलों से समस्याएं पैदा हुई हैं, यह बिल्कुल साफ है. फिलहाल हम फ्यूल की कुछ कमी देख रहे हैं, लेकिन यह बहुत गंभीर नहीं है.” उन्होने कहा कि इस समय सबसे बड़ा काम रूस की हवाई रक्षा क्षमता को बढ़ाना और खासकर क्रीमिया तक तेल और गैस की सप्लाई सुनिश्चित करना है.
बातचीत को तैयार पुतिन
इंटरव्यू के दौरान पुतिन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी वार्ताकारों की एक टीम मॉस्को आएगी, जिससे यूक्रेन युद्ध खत्म करने पर चर्चा हो सके. यह तब होगा, जब अमेरिका ईरान और मिडिल ईस्ट के संघर्ष से फ्री हो जाएगा. हालांकि उनके इंटरव्यू का यह हिस्सा क्रेमलिन ने प्रकाशित नहीं किया, लेकिन रूस की न्यूज एजेंसियों ने इसे जारी किया. रूसी पत्रकार पावेल जारुबिन ने भी इसे टेलीग्राम प्लेटफॉर्म पर शेयर किया है.
दरअसल, फ्रांस में हुए G7 शिखर सम्मेलन के बाद की स्थिति को लेकर रूस-अमेरिका संबंधों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में रूसी राष्ट्रपति ये बाते कहीं. उन्होंने कहा कि जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि रूस को यूक्रेन के साथ समझौता कर लेना चाहिए.
बता दें कि रूस के कब्जे वाले क्रीमिया के अधिकारियों ने शुक्रवार को तेल-गैस की कमी और बिजली कटौती के कारण आपातकाल घोषित कर दिया. उनका कहना है कि यह स्थिति यूक्रेन द्वारा सप्लाई के रास्तों और तेल सुविधाओं पर किए गए हमलों की वजह से बनी. रूस ने 2014 में क्रीमिया को यूक्रेन से अपने कब्जे में ले लिया था. लेकिन दुनिया के ज्यादातर देश इस कब्जे को मान्यता नहीं देते.

