Russia Ukraine War: यूक्रेन की अन्य देशो के साथ तो जंग लड़ ही रहा है साथ ही उसके घर मे भी लड़ाई जारी है, जो सत्ता और सैन्य रणनीति से जुड़ी है. राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रक्षा मंत्री मिखाइलो फेडोरोव को हटाने का फैसला किया था, जिसका जमकर विरोध हो रहा है. कीव समेत कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए. उनके हाथों में ‘फेडोरोव से दूर रहो’ और ‘जीत को बर्बाद मत करो’ जैसे नारे लगाए. बता दें कि विरोध की सबसे बड़ी वजह यह है कि फेडोरोव को यूक्रेन की ड्रोन क्रांति और हाई-टेक युद्ध रणनीति का चेहरा माना जाता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध में ड्रोन ने रूस की सेना को पूरे देश पर कब्जा करने से रोक कर रखा है. दरअसल, रूस के पास ब्रह्मास के नाम पर परमाणु हथियार है तो यूक्रेन के पास सस्ते ड्रोन हैं. ऐसे में रक्षा मंत्री मिखाइलो को यूक्रेन के ‘ब्रह्मास्त्र का विश्वकर्मा’ भी कह सकते हैं. जंग के बीच जनता का यह प्रदर्शन सीधे राष्ट्रपति के खिलाफ है. यह विरोध दिखाता है कि जनता का एक वर्ग अब नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठा रहा है.
फेडोरोव को हटाने पर बवाल?
दरअसल, 35 साल के मिखाइलो फेडोरोव जनवरी में ही रक्षा मंत्री बने थे. इससे पहले वे डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्री थे और रूस के खिलाफ यूक्रेन की ‘आर्मी ऑफ ड्रोन्स’ जैसे प्रोजेक्ट के प्रमुख चेहरा रहे. उन्होंने ड्रोन, डेटा एनालिटिक्स और नई टेक्नोलॉजी के जरिए युद्ध लड़ने की रणनीति को बढ़ावा दिया. उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने रक्षा मंत्रालय में भ्रष्टाचार कम करने, खरीद प्रक्रिया तेज करने और युद्ध को तकनीक के जरिए अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की.
क्या है यूक्रेन में विवाद की वजह
हालांकि इस पूरे विवाद के पीछे सिर्फ रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख के बीच मतभेद नहीं हैं. एक तरफ फेडोरोव हैं, जो ड्रोन, साइबर ऑपरेशन, डेटा और स्टार्टअप जैसी तेज फैसले लेने वाली सोच के समर्थक हैं तो वहीं, दूसरी ओर यूक्रेनी सेना प्रमुख ओलेक्सांद्र सिरस्की और पारंपरिक सैन्य ढांचा है, जिस पर पुराने सोवियत दौर की नौकरशाही वाली कार्यशैली के आरोप लगते रहे हैं. इसका खुलासा खुद रक्षा मंत्री ने किया कि उन्होंने जेलेंस्की से सिरस्की और चीफ ऑफ जनरल स्टाफ एंड्री हनातोव को बदलने का सुझाव दिया था. लेकिन राष्ट्रपति इसके लिए तैयार नहीं हुए.
रक्षा मंत्रालय हाल के महीनों में रूस के कब्जे वाले क्रीमिया पर ड्रोन हमलों की रणनीति में बड़ी भूमिका निभा रहा था. हाल ही में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि यूक्रेन ड्रोन हमलों के जरिए क्रीमिया को रूस से पूरी तरह काट देगा. यही वजह है कि कई सैन्य विशेषज्ञ इस फैसले की टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं.

