UN में कश्मीर का मुद्दा उठाकर बुरे फंसे PM शहबाज! बाहर बलूचियों ने खोली PAK सरकार की पोल, जमकर किया प्रदर्शन

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United Nations: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर का मुद्दा भी उठाया और भारत पर वहां मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया. हालांकि, मूल लेख ने तीखी टिप्पणी करते हुए इसे यूएन के मंच पर पाकिस्तान की एक तरह की बार-बार दोहराई जाने वाली प्रतिक्रिया बताया है. उसी समय संयुक्त राष्ट्र के बाहर बलूच और पश्तून समुदाय के लोग पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे.

लोगों को जबरन गायब करने जैसे आरोप

प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर महिलाओं और बच्चों की हत्या, बलूच और पश्तून लोगों को यातना देने, बिना वजह गिरफ्तार करने और लोगों को जबरन गायब करने जैसे आरोप लगाए. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक आक्रामक और युद्धोन्मादी भाषण में भारत को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि भारत, भारत, भारत… इस बारे में कोई गलती न करे. शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए शरीफ ने कहा क‍ि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका रास्ता बदलने की किसी भी कोशिश को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा.

हिंदुओं और मुसलमानों समेत 26 लोगों की ले ली थी जान 

भारत ने सिंधु नदी के पानी के बंटवारे से जुड़ी 1960 की संधि को तब रोक दिया था, जब पिछले साल पहलगाम में पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों ने धार्मिक आधार पर हमला करके हिंदुओं और मुसलमानों समेत 26 लोगों की जान ले ली थी. एक मानवाधिकार संगठन के हवाले से लेख में दावा किया गया है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हाल के महीनों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 90 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. ये प्रदर्शन बाहरी लोगों को वहां लाने और पाकिस्तान की ओर से कराए जाने वाले चुनावों में कथित हेरफेर की कोशिशों के खिलाफ हो रहे थे.

कश्मीर को लेकर तीखी बयानबाजी

कश्मीर पर बोलते हुए शहबाज शरीफ ने कहा क‍ि कश्मीर पाकिस्तान की जुगुलर वेन यानी गले की मुख्य नस है और हमेशा रहेगा. कश्मीर को लेकर तीखी बयानबाजी करते हुए शरीफ ने एक ऐसा उदाहरण दिया, जिसने उलटे पाकिस्तान की अपनी कमजोरी को उजागर कर दिया. जगुलर वेन यानी गले की प्रमुख नस शरीर का बेहद संवेदनशील हिस्सा होती है. वहां गंभीर चोट लगने से जान भी जा सकती है. इसलिए इसे ताकत या सुरक्षा की निशानी बताने के बजाय यह उदाहरण कमजोरी या संवेदनशीलता को दिखाता है.

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