Ashtavakrasana: शरीर ही नहीं, मन को भी साधता है अष्टावक्रासन, जानें करने का सही तरीका और सावधानियां

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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योग सिर्फ शरीर को लचीला बनाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि भारतीय परंपरा में इसे शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम भी माना जाता है. इसी योग परंपरा का एक चुनौतीपूर्ण आसन है अष्टावक्रासन, जिसे आठ-कोणीय आसन भी कहा जाता है. यह आसन देखने में कठिन जरूर लगता है, लेकिन इसके अभ्यास में शरीर का संतुलन, बाजुओं की ताकत और कोर की मजबूती अहम भूमिका निभाती है. महर्षि अष्टावक्र के नाम पर रखे गए इस आसन में शरीर को भुजाओं के सहारे संतुलित किया जाता है. ‘अष्टावक्र’ का अर्थ आठ वक्रताओं से जुड़ा है, जबकि ‘आसन’ का अर्थ मुद्रा या स्थिति है. अष्टावक्रासन के दौरान बाजुओं, कलाई, कंधों, नितंबों और पेट यानी कोर की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं.

अष्टावक्रासन क्या है?

आयुष मंत्रालय से जुड़े योग संसाधनों में योगासन के अभ्यास, लाभ और सावधानियों के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं. अष्टावक्रासन एक उन्नत स्तर का आर्म-बैलेंसिंग आसन है, जिसमें शरीर का भार मुख्य रूप से भुजाओं पर रहता है. इसे करने के लिए हाथों की मजबूती के साथ शरीर का संतुलन और कोर स्टेबिलिटी जरूरी होती है. इस आसन में साधक शरीर को कुछ समय के लिए भुजाओं के सहारे ऊपर उठाकर संतुलित करता है. भुजाएं चतुरंग आसन जैसी स्थिति में रहती हैं और पैरों को एक ओर रखते हुए शरीर को स्थिर रखने की कोशिश की जाती है. यही वजह है कि इसे शुरुआती लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण आसन माना जाता है.

अष्टावक्रासन कैसे करें?

अष्टावक्रासन का अभ्यास जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए. इसे करने के लिए सबसे पहले समतल स्थान पर बैठ जाएं और दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा रखें. रीढ़ को सीधा रखते हुए शरीर को स्थिर करें. अब एक पैर को मोड़कर उसे दूसरे पैर के ऊपर ले जाएं और शरीर को इस तरह व्यवस्थित करें कि पैर और कंधे के बीच सही स्थिति बन सके. इसके बाद दोनों हथेलियों को जमीन पर मजबूती से टिकाएं.

धीरे-धीरे शरीर का भार दोनों हाथों पर डालते हुए कूल्हों और पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं. पैरों को एक दिशा में सीधा रखते हुए शरीर को भुजाओं के सहारे संतुलित करें. इस दौरान पेट और कोर की मांसपेशियों को सक्रिय रखें और गर्दन को सामान्य स्थिति में रखें. कुछ सेकंड तक संतुलन बनाए रखने के बाद धीरे-धीरे शरीर को वापस जमीन पर ले आएं. शुरुआत में संतुलन बनाना मुश्किल हो सकता है, इसलिए नए अभ्यासकर्ता किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसका अभ्यास करें.

शरीर के लिए क्यों खास है यह आसन?

अष्टावक्रासन में शरीर का भार हाथों पर आने के कारण बाजुओं और कलाई की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं. इसके साथ कंधे, कोर, पीठ और नितंबों की मांसपेशियों पर भी काम होता है. नियमित और सही अभ्यास से शरीर के संतुलन और मांसपेशियों की मजबूती पर काम किया जा सकता है. यह आसन शरीर और मांसपेशियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में भी मदद कर सकता है. शरीर को एक निश्चित स्थिति में संतुलित रखने के लिए एकाग्रता और नियंत्रण की जरूरत होती है.

इन लोगों को नहीं करना चाहिए अष्टावक्रासन

अष्टावक्रासन एक उन्नत स्तर का आसन है, इसलिए हर व्यक्ति के लिए इसका अभ्यास उपयुक्त नहीं माना जा सकता. अगर कलाई, कंधे, कोहनी या पीठ में गंभीर चोट या दर्द है तो इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए. गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को भी इस आसन से बचना चाहिए. हर्निया या कार्पल टनल सिंड्रोम से पीड़ित लोगों को भी अष्टावक्रासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए.

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