Dhaka: बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीणा सिकरी ने कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान खुद कभी शेख हसीना के खिलाफ बोलते थे, लेकिन सत्ता में आते ही उनका रुख बदल गया है. रहमान की सरकार शेख हसीना के दिसंबर तक देश लौटने के ऐलान से डरी हुई है. अवामी लीग की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से ही ढाका भारत से दूरी बना रहा है और भारत के न्योते का 6 महीने से जवाब नहीं दे रहा. उन्होंने कहा कि शेख हसीना को बहाना बनाकर रहमान सरकार भारत आने से बच रही है, जबकि प्रत्यर्पण पूरी तरह कानूनी मामला है.
रहमान को भारत आने का न्योता
पूर्व राजनयिक ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भारत आने का न्योता छह महीने पहले, फरवरी 2026 में दिया गया था, जब उन्होंने प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी. मुझे लगता है कि भारत सरकार की तरफ से पीएम तारिक रहमान को प्रधानमंत्री बनने के बाद मिला पहला न्योता था, और हम छह महीने से जवाब का इंतजार कर रहे हैं. कुछ हफ्ते पहले, हमने बिम्सेटक के चेयरमैन के तौर पर उन्हें ब्रिक्स समिट के लिए दूसरा न्योता दिया था.
यूनुस के कार्यकाल में अवामी लीग पर प्रतिबंध
पूर्व हाई कमिश्नर ने आगे कहा कि मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल में अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाए जाने पर तारिक रहमान ने कहा था कि हम किसी भी पार्टी पर लगाए जाने वाले प्रतिबंध का समर्थन नहीं करते हैं. पार्टी सक्रिय रहनी चाहिए. अगर लोग पसंद नहीं करेंगे, तो उस पार्टी के लिए वोट नहीं करेंगे. जब रहमान लंदन में रहते थे, तो वह अक्सर राजनीतिक रैली को वीडियो के माध्यम से संबोधित करते थे. वह सरकार के खिलाफ सभी तरह की टिप्पणी करते थे. शेख हसीना ने कभी भी उन पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया.
अगस्त तक भारत आ सकते हैं रहमान
वीणा सिकरी ने कहा कि रहमान के प्रधानमंत्री बनते ही, इस तरह की कार्रवाई हो रही है. वह भारत में नहीं आने के पीछे शेख हसीना को एक वजह के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. पहले ऐसी चर्चा थी कि 20-22 अगस्त तक रहमान भारत आ सकते हैं. हालांकि, अचानक से शेख हसीना की 5 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद इसे एक मुद्दा बनाया जा रहा है. प्रत्यर्पण एक कानूनी मामला है, जिसमें लंबा वक्त लगता है. बांग्लादेश की सरकार डर गई है.
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