श्रीलंका ने चीनी जासूसी जहाज पर लगाया प्रतिबंध तो चीन को लगी मिर्ची, भारत पर कसा तंज, कहा…

Raginee Rai
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Sri lanka: श्रीलंका ने अपने बंदरगाहों पर चीनी जासूसी जहाजों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया है. इस वजह से चीन बौखलाया हुआ है. चीन के एक शीर्ष राजनयिक का मानना है कि तीसरे देश के इशारे पर श्रीलंका ने यह कदम उठाया है. ये देश कोई और नहीं बल्कि भारत है. चीन के एक शीर्ष राजनयिक ने कहा है कि चीन श्रीलंका के जलक्षेत्र में रिसर्च जहाजों पर रोक लगाने से नाखुश है. वहीं भारत पर अप्रत्‍यक्ष रूप से तंज कसते हुए कहा कि कुछ देश इसे अपनी कूटनीतिक जीत मानते हैं, लेकिन ऐसा बिल्‍कुल नहीं है.

श्रीलंका ने भारत के इशारे पर…

डेली मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, कोलंबो पोर्ट सिटी में प्रदर्शनी केंद्र में पत्रकारों से बातचीत में चीन के दूतावास के उप प्रमुख यानवेई झू ने श्रीलंका पर दबाव बनाने की भी कोशिश की. यानवेई झू ने कहा कि चीन में सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि श्रीलंका एक मित्रवत देश क्यों है, जब उसने इस तरह का कदम उठाया है. उन्होंने परोक्ष रूप से कहा कि श्रीलंका ने भारत के इशारे पर चीनी जहाजों को रोका है. यानवेई झू ने कहा कि तीसरे पक्ष के कहने पर उठाए गए कदम को कुछ देश एक कूटनीतिक जीत मानते हैं.

फायदा नहीं उठाना चाहता चीन

झू ने कहा कि चीन चुप है, क्योंकि उसे श्रीलंका की कठिन स्थिति का फायदा नहीं उठाना चाहता. उन्होंने कहा कि चीन श्रीलंका की स्वतंत्रता और संप्रभुता का सम्मान करता है, अगर यह श्रीलंका का स्वतंत्र निर्णय है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि श्रीलंका के अधिकारियों के पास इस तरह के रिसर्च करने की क्षमता नहीं है और चीन सहायता के लिए हाथ बढ़ाया है. कोई भी अन्य देश इस तरह से आगे नहीं आया.

श्रीलंका ने लगाया एक साल का प्रतिबंध

बता दें कि श्रीलंका ने इस साल एक वर्ष के लिए किसी भी अनुसंधान जहाज को अपने बंदरगाहों पर रुकने या अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के अंदर संचालन करने पर प्रतिबंध लगा दिया है. साल 2023 में श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के साथ पीएम मोदी की बैठक हुई थी. इसमें उन्होंने भारत की रणनीतिक और सुरक्षा चिंताओं का सम्मान करने का अनुरोध किया था. विदेशी रिसर्च जहाजों के रुकने पर रोक लगाने की जानकारी भारत को श्रीलंका ने दी थी.  चीन के लिए यह बड़ा झटका था.

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