सर्बिया में छात्रों ने पलटी बाजी: वुसिक की सत्ता समाप्त, राष्ट्रपति ने खुद मानी हार

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Serbia Elections: सर्बिया की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. करीब दो साल से सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है. शुरुआती नतीजों के आधार पर लंबे समय से सत्ता में काबिज अलेक्जेंडर वुसिक ने हार मान ली है. इस चुनाव को सर्बिया के भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. छात्रों की अगुवाई वाले समूह को संसद में बहुमत मिलने के आसार हैं. नतीजों के शुरुआती संकेत मिलते ही राजधानी बेलग्रेड में लोगों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया.

खुद स्वीकार की हार

वुसिक ने रविवार को बेलग्रेड में अपनी पार्टी के मुख्यालय में समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि शुरुआती आंकड़ों से साफ है कि उनकी पार्टी चुनाव हार रही है. वुसिक के अनुसार, 250 सीटों वाली संसद में छात्र समर्थित समूह को 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं, जबकि उनकी पार्टी को करीब 105 सीटों से संतोष करना पड़ सकता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी अंतिम नतीजे आने बाकी हैं.

छात्रों को मिल सकती हैं 138 सीटें

चुनाव सर्वेक्षण एजेंसी CESID और IPSOS के शुरुआती अनुमानों ने भी छात्रों की बढ़त के संकेत दिए. सर्वे के अनुसार, छात्र आंदोलन से जुड़े उम्मीदवारों को करीब 138 सीटें मिल सकती हैं. वहीं, वुसिक की सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) को 104 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया. बाकी सीटें जातीय अल्पसंख्यकों की पार्टियों के खाते में जा सकती हैं. अगर ये अनुमान अंतिम नतीजों में बदलते हैं, तो सर्बिया की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है.

बेलग्रेड में जश्न

चुनाव के शुरुआती नतीजे सामने आते ही बेलग्रेड में छात्रों और उनके समर्थकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई. छात्र आंदोलन के मुख्यालय में लोग ‘जीत, जीत’ के नारे लगाते दिखे. कहीं तालियां बज रही थीं, तो कहीं लोग एक-दूसरे को गले लगाकर खुशी जाहिर कर रहे थे. बेलग्रेड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रादोमिर साइचिक ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज लोगों की आवाज सुनी जा रही है. उन्होंने कहा कि जीत का जश्न मनाने के बाद अब देश के भविष्य को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी भी उठानी होगी.

चुनाव की तस्वीर बदली रिकॉर्ड मतदान ने

भारी मतदान इस चुनाव की एक बड़ी खासियत रहा. चुनाव निगरानी संस्थाओं CESID और IPSOS के मुताबिक, रविवार शाम सात बजे तक 67.6 प्रतिशत मतदाता वोट डाल चुके थे. बताया गया कि 1992 में यूगोस्लाविया के विघटन के बाद यह सबसे अधिक मतदान था. चुनाव से पहले आए सर्वेक्षणों में तस्वीर साफ नहीं थी. माना जा रहा था कि मुकाबला कड़ा होगा और छात्रों के आंदोलन को चुनाव में कितनी सफलता मिलेगी, यह कहना मुश्किल है, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के लिए बाहर निकलने से सत्ता परिवर्तन की संभावनाएं मजबूत होती दिखाई दीं.

छात्र आंदोलन पिछले दो साल से वुसिक सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहा था. आंदोलन ने युवाओं के साथ समाज के दूसरे वर्गों का भी ध्यान खींचा. सरकार के कामकाज और वुसिक की बढ़ती सत्तावादी शैली को लेकर असंतोष इस चुनाव का अहम मुद्दा बना. वुसिक एक दशक से ज्यादा समय तक सर्बिया की राजनीति में प्रभावशाली बने रहे. पिछले महीने छात्रों के बढ़ते दबाव के बीच उन्होंने राष्ट्रपति पद छोड़ने और समय से पहले चुनाव कराने का फैसला किया था. अब शुरुआती नतीजे उनके राजनीतिक भविष्य के लिए बड़ा झटका माने जा रहे हैं.

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