Supreme Court on Internet Access: 21वीं सदी में इंटरनेट सामान्य जनजीवन का हिस्सा बन चुका है. घर से लेकर आफिस तक के सारे काम यहां तक की पढ़ाई-लिखाई हर क्षेत्र में इंटरनेट की जरूरत काफी बढ़ चुकी है. बैंकिंग से लेकर ट्रेन-बस टिकट बुक करने तक में इंटरनेट की भूमिका अहम है. अब इसी इंटरनेट को लेकर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला सामने आया है.
इंटरनेट से बच्चों को तरह वंचित नहीं किया जा सकता
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने इंटरनेट एक्सेस को फंडामेंटल राइट यानी मौलिक अधिकार माना है. कोर्ट ने कहा कि बच्चों समेत सभी के लिए इंटरनेट मौलिक अधिकार है. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लेख किया है. बच्चों को पूरी तरह से इंटरनेट से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि वे भी इसके हकदार हैं
शीर्ष अदालत ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनकी स्वतंत्रता एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि वे दोनों के हकदार हैं. पीठ ने निर्देश दिया कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को हटाने के तंत्र को मजबूत किया जाए.

