Navratri Jayanti Signals: नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना, भक्ति और साधना के लिए बेहद खास माना जाता है. वहीं नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ जयंती बोने की भी परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में बोई गई जयंती के अंकुरों, उनकी वृद्धि और रंग-रूप को शुभ-अशुभ संकेतों से जोड़कर देखा जाता है. ज्योतिषी मान्यता है कि इन संकेतों के माध्यम से आने वाले समय की परिस्थितियों का अनुमान लगाया जाता है.
नवरात्रि में क्यों बोई जाती है जयंती?
नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना की जाती है. इस दौरान पूजा स्थल पर मिट्टी के पात्र में जौ बोने की परंपरा भी प्रचलित है. कई क्षेत्रों में इन्हें जयंती या जवारे कहा जाता है. नौ दिनों तक इनकी देखभाल की जाती है और मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं में जयंती को अन्नपूर्णा देवी माना जाता है और यह जितनी तेजी से बढ़ती है, उतनी ही माता की कृपा बनी रहती है.
बता दें कि चैत्र और शारदीय, दोनों नवरात्रि में जौ बोने की परंपरा निभाई जाती है. इन दोनों पर्वों के बीच लगभग छह महीने का अंतर होता है. इसी वजह से कुछ धार्मिक मान्यताओं में जयंती की वृद्धि को आने वाले 6 महीनों के संकेत के रूप में देखा जाता है. अब चूंकि शारदीय नवरात्रि अक्टूबर में पड़े हैं और आने वाले नवरात्रि अगले साल 2027 में आएंगे. ऐसे में इन जयंती के माध्यम से आप आने वाले 6 महीने कैसे रहेंगे, यह आप जान सकते हैं.
जयंती के बढ़ने के तरीके से मिलते हैं क्या संकेत?
- तेजी से बढ़ने वाले हरे अंकुर: पारंपरिक मान्यताओं में जौ का अच्छी तरह उगना और हरा-भरा रहना शुभता, समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है.
- पीले या कमजोर अंकुर: अगर जयंती पीली पड़ जाए या उसकी वृद्धि कमजोर रहे, तो इसे कुछ परंपराओं में सावधानी बरतने का संकेत माना जाता है. हालांकि ऐसा पानी की कमी, मिट्टी या रोशनी के कारण भी हो सकता है.
- समान रूप से बढ़ने वाले जवारे: जौ के अंकुरों का संतुलित और अच्छी तरह बढ़ना पूजा-पद्धति में शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है. इसे सुख-शांति और खुशहाली की कामना से जोड़ा जाता है.
- देरी से अंकुरिकत होने वाली जयंती: जयंती आमतौर पर दो से तीन दिन बाद अंकुरित हो जाती है लेकिन अगर देरी से अंकुरित हो रही है तो आने वाले 6 महीनों में आपको अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है. साथ ही आप जिस चीज के लिए मेहनत कर रहे हैं, उसको प्राप्त करने में भी देरी हो सकती है.
- लालिमा लिए हुए जयंती: कई बार जयंती लालिमा यानी लाल हो जाती है तो इसका अर्थ है कि आपको आने वाले महीनों में शत्रुओं व रोगों का सामना करना पड़ सकता है.
- जयंती का रंग ऊपर से पीला लेकिन जड़ हरी: अगर जयंती का रंग ऊपर से पीला और जड़ से हरा है तो आने वाले कुछ महीनों में तो बेहतरीन रहेंगे लेकिन कुछ महीनों बाद परेशानियां शुरू हो जाएंगी.
- जयंती का रंग ऊपर से हरा लेकिन जड़ पीली: अगर जयंती का रंग ऊपर से हरा है और जड़ पीली हैं तो इसका अर्थ है कि आने वाले महीने भले ही कितनी परेशानी वाले हों लेकिन अंत में सब सही हो जाएगा.

