Taipei: ईरान से युद्ध में उलझे अमेरिका को देख चीन ताइवान को निगलने की तैयारी कर रहा है. चीन के बढ़ते सैन्य दबाव और संभावित युद्ध के खतरे के बीच ताइवान के अंदर गंभीर ट्रेंड देखने को मिल रहा है. एक तरफ सरकार युद्ध की तैयारी में जुटी है, तो दूसरी तरफ आम लोग अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ‘प्लान B’ बना रहे हैं, जिसमें विदेशों में पैसा, पासपोर्ट और ठिकाना शामिल है.
बड़े स्तर पर युद्धाभ्यास शुरू
ताइवान ने हाल के महीनों में अपने रक्षा खर्च को बढ़ाया है, अनिवार्य सैन्य सेवा की अवधि बढ़ाई है और बड़े स्तर पर युद्धाभ्यास शुरू किए हैं. यह सब चीन के बढ़ते आक्रामक रुख के जवाब में किया जा रहा है, जो ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग की धमकी देता रहा है. ताइपे में काम करने वाले 51 वर्षीय फाइनेंस प्रोफेशनल नेल्सन येह जैसे लोग इस अनिश्चित माहौल में अपनी अलग रणनीति बना रहे हैं.
संपत्ति का एक हिस्सा सिंगापुर में ट्रांसफर
उन्होंने अपनी संपत्ति का एक हिस्सा सिंगापुर में ट्रांसफर किया, तुर्की की नागरिकता ली और दूसरा पासपोर्ट हासिल कर लिया. उनका कहना है कि संभावना कम है, लेकिन अगर युद्ध हुआ तो नुकसान बहुत बड़ा होगा, इसलिए बैकअप प्लान जरूरी है. यह सोच अब सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में ताइवान के लोगों में विदेश जाने, दूसरा पासपोर्ट लेने और संपत्ति बाहर रखने की मांग तेजी से बढ़ी है.
हांगकांग के उदाहरण से भी प्रभावित
कई ताइवानी हांगकांग के उदाहरण से भी प्रभावित हैं, जहां चीन के नियंत्रण बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में लोग देश छोड़कर चले गए. आज हांगकांग, कल ताइवान जैसे नारे अब फिर चर्चा में हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह डर और गहरा गया है. ताइवान की सरकार जहां रक्षा तैयारियों को मजबूत कर रही है, वहीं आम नागरिकों के बीच दो तरह की मानसिकता दिख रही है.
देश के लिए लड़ने को तैयार
कुछ लोग युद्ध की स्थिति में देश के लिए लड़ने को तैयार हैं, जबकि कुछ लोग सुरक्षित निकलने का रास्ता खोज रहे हैं. थाईलैंड, कंबोडिया, मलेशिया और यूरोप के कुछ देशों में ताइवानी लोगों द्वारा संपत्ति खरीदने और नागरिकता लेने का ट्रेंड बढ़ रहा है.