Pok Protest: पाकिस्तान कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर यानी (पीओजेके) में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच लगातार हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तान के प्रशासनिक तंत्र के बीच टकराव कम होने के बजाय बढ़ता दिखाई दे रहा है. ऐसे में अगले 24 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं. खुफिया सूत्रों की माने तो, पीओजेके में विरोध प्रदर्शनों को लेकर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और दोनों पक्ष पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे हैं. इसी बीच पाकिस्तान पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाने के आरोप भी लग रहे हैं.
मालूम हो कि पीओजेके में लंबे समय से आर्थिक बदहाली, महंगाई, बिजली संकट और कथित भेदभाव के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे हैं. अब प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी आवाज दबाने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई जा रही है. दूसरी तरफ पाकिस्तान का दावा है कि प्रदर्शन के पीछे बाहरी ताकतों का हाथ है. इसी बीच संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने पाकिस्तान रेंजर्स को क्षेत्र से हटाने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है.
खुफिया सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान का प्रशासन अब इन विरोध प्रदर्शनों को सामान्य जन आंदोलन के बजाय सुरक्षा चुनौती के रूप में देख रहा है. आरोप है कि कई प्रदर्शनकारियों और कार्यकर्ताओं को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत सूचीबद्ध किया गया है. बताया जा रहा है कि करीब 150 कार्यकर्ताओं को एंटी-टेरर फोर्थ शेड्यूल में शामिल किया गया है. प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि इससे आम नागरिकों को डराने और आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है.
सूत्रों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर कई ऐसे संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करने और हथियार उठाने के आरोप लगाए जा रहे हैं. इसके साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों को भारत से आर्थिक मदद मिल रही है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. भारतीय एजेंसियां भी इन घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं और उनका मानना है कि आने वाले दिनों में दुष्प्रचार अभियान और तेज हो सकता है.
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें?
जेएएसी का कहना है कि लोगों की मांगें पूरी तरह स्थानीय मुद्दों से जुड़ी हैं. इनमें महंगाई कम करना, बिजली दरों में राहत, रोजगार के अवसर बढ़ाना और क्षेत्र में कथित भेदभाव समाप्त करना शामिल है. संगठन का आरोप है कि उनकी जायज मांगों पर बातचीत करने के बजाय प्रशासन बल प्रयोग का रास्ता अपना रहा है. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अतिरिक्त सुरक्षा बलों को नहीं हटाया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.