Washington: ट्रंप प्रशासन ने विदेशी देशों की मैन्युफैक्चरिंग और व्यापारिक नीतियों की नई जांच शुरू की है. इस जांच के दायरे में भारत समेत कुल 16 अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं. इस जांच में अमेरिका के कई बड़े व्यापारिक साझेदार शामिल हैं. इनमें प्रमुख देश चीन, यूरोपियन यूनियन, मेक्सिको, भारत, जापान, साउथ कोरिया और ताइवान हैं.
अब ट्रंप प्रशासन ने अपनाया नया रास्ता
इसके अलावा जिन देशों को जांच में शामिल किया गया है, उनमें स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देश भी शामिल हैं. दरअसल, US सुप्रीम कोर्ट ने पहले लगाए गए कुछ टैरिफ को आर्थिक आपातकाल बताकर खारिज कर दिया था. इसके बाद अब ट्रंप प्रशासन ने एक नया रास्ता अपनाते हुए विदेशी देशों की उत्पादन क्षमता और व्यापार नीतियों की जांच शुरू करने का फैसला किया है.
किसी देश की व्यापारिक नीतियां अनुचित
अमेरिका के ट्रेड प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने आधिकारिक घोषणा में बताया कि यह जांच Section 301 of the Trade Act of 1974 के तहत शुरू की जा रही है. इस कानून के तहत अगर अमेरिका को लगे कि किसी देश की व्यापारिक नीतियां अनुचित हैं या अमेरिकी उद्योग को नुकसान पहुंचा रही हैं तो अमेरिका उस देश के उत्पादों पर नए आयात कर (Import Tariffs) लगा सकता है.
घरेलू उत्पादन क्षमता प्रभावित
अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि कई देशों ने ऐसी उत्पादन क्षमता विकसित कर ली है जो घरेलू और वैश्विक मांग से कहीं ज्यादा है. उनके मुताबिक कई देश जरूरत से ज्यादा उत्पादन करके अपने उत्पाद अमेरिका में बेच रहे हैं. इससे अमेरिकी कंपनियों की घरेलू उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है और निवेश व विस्तार पर भी असर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका अब अपने औद्योगिक आधार को दूसरे देशों के कारण कमजोर नहीं होने देगा.
पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं
हालांकि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन दोनों देशों ने इसे ‘ऐतिहासिक’ समझौता बताया है. विशेषज्ञों का मानना है कि नई जांच के बावजूद भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध आगे भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे और आने वाले समय में इस मुद्दे पर और बातचीत हो सकती है.
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