वैश्विक राजनीति के बदलते माहौल के बीच अमेरिका और भारत के बीच उच्चस्तरीय बातचीत एक बार फिर चर्चा में आ गई है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत हुई, जिसमें कई अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की गई. इस बातचीत का केंद्र मध्य पूर्व की स्थिति, खासकर इजरायल और लेबनान के बीच जारी तनाव और संभावित सीजफायर रहा. इसके अलावा ट्रंप के पाकिस्तान दौरे को लेकर दिए गए बयान ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है.
ट्रंप और मोदी के बीच सकारात्मक बातचीत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बातचीत को सकारात्मक बताया. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “मेरी उनसे बहुत अच्छी बात हुई। वह बहुत अच्छा कर रहे हैं.” उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर की कोशिशों को लेकर उम्मीद जताई है. यह संकेत देता है कि भारत इस मुद्दे पर शांति और कूटनीतिक समाधान का समर्थन कर रहा है.
पाकिस्तान दौरे को लेकर ट्रंप के संकेत
इस बातचीत के बीच ट्रंप का एक और बड़ा बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान जाने की संभावना जताई. उन्होंने कहा, “मैं पाकिस्तान जाऊंगा। अगर इस्लामाबाद में डील साइन होती है, तो मैं शायद जाऊंगा. वे लोग मुझे चाहते हैं। पाकिस्तान बहुत अच्छा रहा है.” ट्रंप का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि सुरक्षा कारणों के चलते कई वर्षों से कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति पाकिस्तान नहीं गया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह दौरा तभी संभव होगा जब ईरान के साथ सीजफायर को लेकर कोई डील फाइनल होती है.
मिडिल ईस्ट में तेज कूटनीतिक हलचल
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका मध्य पूर्व में कई स्तरों पर कूटनीतिक प्रयास कर रहा है. इसमें ईरान के साथ बातचीत और इजरायल-लेबनान सीमा पर तनाव कम करने की कोशिशें शामिल हैं. ट्रंप ने बताया कि दोनों देशों के बीच सीजफायर की दिशा में सकारात्मक प्रगति हो रही है. उन्होंने कहा, “वे सभी सहमत हैं। यह लगभग एक हफ्ते के लिए एक बहुत अच्छा छोटा पैकेज है.”
नेतन्याहू और लेबनान नेतृत्व से भी बातचीत
ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान की लीडरशिप से बातचीत की है. उन्होंने कहा, “हम नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति से मिलने वाले हैं.” इस संभावित बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि ट्रंप ने संकेत दिया कि यह 44 साल में पहली बार होगा जब इस तरह का सीधा संवाद हो सकता है. उन्होंने कहा, “हम एक मीटिंग करने जा रहे हैं, 44 साल में पहली बार और यह व्हाइट हाउस में हो सकती है।”
हिज्बुल्लाह को लेकर ट्रंप का बयान
हिज्बुल्लाह को लेकर भी ट्रंप ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हिज्बुल्लाह सीजफायर का पालन करेगा. उन्होंने कहा, “हम बहुत सारे बम नहीं गिराएंगे, हम देखेंगे कि क्या हम लेबनान और इजरायल के बीच शांति बना सकते हैं.” इस बयान से साफ है कि अमेरिका इस समय सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहा है.
कब हो सकती है बड़ी बैठक
ट्रंप ने संकेत दिया कि आने वाले एक से दो हफ्तों में यह अहम बैठक हो सकती है. उन्होंने कहा, “मैं निश्चित रूप से सही समय पर वहां जाऊंगा.” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर बातचीत आगे बढ़ती है, तो वे इस क्षेत्र का दौरा भी कर सकते हैं.

