भक्ति का फल भोग नहीं, भगवान की प्राप्ति है: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, निष्काम भक्ति ही भागवतशास्त्र का विषय है। भक्ति धन या सुख प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि परमात्मा को प्राप्त करने के लिए करना चाहिए। भक्ति का फल भोग नहीं, भगवान हैं।
भगवान के पास से लौकिक सुख की माँग करने वाला भगवान को पहचानता ही नहीं। प्रभु से कुछ माँगो मत, नहीं तो उन्हें बुरा लगेगा। क्या प्रभु कंजूस हैं, अन्यायी हैं, जिसके सामने बारम्बार माँगना पड़ता हो। प्रभु तो अन्तर्यामी हैं, उदार हैं और पूर्ण न्यायी हैं। इसीलिए प्रभु से कुछ माँगने की जरूरत नहीं।
हमारे कल्याण के लिए जो जरूरी है, वह सब प्रभु स्वयं ही देने वाले हैं।जिसको विवेक नहीं, वह संसार रूपी सागर में डूब मरता है। यदि हृदय हमेशा भगवद्भाव में ही डूबा होगा तो पाप एवं विकार का नाश होगा। जिसके मुख में मिठास किन्तु मन में जहर है, ऐसे मानव-सर्प का विश्वास कौन करेगा!
केवल शरीर का नहीं, मन का उपवास ही प्रभु के पास पहुंचाएगा। पाप और प्रेत ये दोनों एक जैसे हैं। धन का दुरुपयोग लक्ष्मी का अपमान है। ज्ञान का रूप यदि क्रिया में परिवर्तित नहीं होता तो वह शुष्क ही रहेगा।
जिसके जीवन में संयम नहीं और प्रभु भक्ति के लिए उसके पास कोई नियम नहीं, उसका जीवन व्यर्थ है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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