चौंकाने वाली रिपोर्ट: खुद अमेरिकियों को पसंद नहीं आ रहा अपना देश, अब न्यूजीलैंड में बना रहे आशियाना

New Delhi: अमेरिका से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. US के कई अरबपति और बड़े निवेशक अब न्यूजीलैंड में अपना दूसरा घर बनाने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च कर रहे हैं. अमेरिका छोड़ने की बात यहां सामान्य लोगों की नहीं हो रही. बात उन अरबपतियों, टेक बिजनेस मैन और वेंचर कैपिटल निवेशकों की है जिनके पास पहले से अमेरिका में कारोबार, संपत्ति और पावर है. इसके बावजूद वे न्यूजीलैंड में स्थायी निवास का अधिकार हासिल करने के लिए करोड़ों डॉलर का निवेश कर रहे हैं.

अकेले अमेरिकी नागरिकों के 277 आवेदन 

प्रतिष्ठित अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले करीब 14 महीनों में 700 से ज्यादा अमीर विदेशी न्यूजीलैंड के गोल्डन वीजा कार्यक्रम के लिए आवेदन कर चुके हैं. इनमें सबसे बड़ी संख्या अमेरिका से आने वाले निवेशकों की है. अकेले 277 आवेदन अमेरिकी नागरिकों के हैं और इनमें भी कैलिफोर्निया के निवेशकों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है. यानी यह सिर्फ वीजा लेने की दौड़ नहीं है, बल्कि दुनिया के सबसे अमीर लोगों की बदलती सोच का संकेत भी है.

वीजा कार्यक्रम पहले से ज्यादा आसान

न्यूजीलैंड ने अपने निवेश आधारित वीजा कार्यक्रम को पहले से ज्यादा आसान बना दिया है. अब कोई विदेशी निवेशक स्थानीय कंपनियों, फंड या अन्य तय क्षेत्रों में कम से कम 50 लाख न्यूजीलैंड डॉलर का निवेश करके वहां स्थायी रूप से रहने, काम करने और पढ़ाई करने का अधिकार हासिल कर सकता है. एक दूसरा विकल्प 1 करोड़ न्यूजीलैंड डॉलर के निवेश का भी है. सरकार ने आवेदन की शर्तें आसान की हैं, वहां रहने की न्यूनतम अवधि कम की है और निवेश के विकल्प भी बढ़ाए हैं. इसी के बाद आवेदनों में कई गुना बढ़ोतरी देखने को मिली है.

संकट के समय सुरक्षित ठिकाना

रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया का तनाव, चीन-अमेरिका में कंप्टीशन और वैश्विक अनिश्चितता के बीच दुनिया के कई अमीर लोग ऐसी जगह तलाश रहे हैं, जिसे संकट के समय सुरक्षित ठिकाना माना जा सके. न्यूजीलैंड भौगोलिक रूप से दुनिया के बड़े संघर्ष क्षेत्रों से काफी दूर है. इसकी आबादी कम है, राजनीतिक व्यवस्था स्थिर है और अपराध दर भी अपेक्षाकृत बहुत कम है.

दुनिया के संपन्न वर्ग को आकर्षित

न्यूजीलैंड का प्राकृतिक वातावरण, साफ हवा, कम भीड़ और बेहतर जीवन गुणवत्ता लंबे समय से दुनिया के संपन्न वर्ग को आकर्षित करती रही है. वहां का क्वीन्सटाउन तो पहले से ही दुनिया के कई अरबपतियों का पसंदीदा ठिकाना बन चुका है. यह मानना गलत होगा कि ये निवेशक केवल छुट्टियां बिताने के लिए न्यूजीलैंड जा रहे हैं. प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन का दावा है कि इन निवेशकों के साथ सिर्फ पूंजी नहीं, बल्कि तकनीक, अनुभव और वैश्विक कारोबारी नेटवर्क भी आ रहे हैं.

नई तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी निवेश

कई स्टार्टअप कंपनियों को विदेशी निवेश मिल रहा है. नई तकनीक, खनिज, कृषि और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ रहा है. यानी, न्यूजीलैंड केवल अमीर लोगों को बसने का मौका नहीं दे रहा, बल्कि उनकी पूंजी को अपनी अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करना चाहता है. रिपोर्ट में एक दिलचस्प बात सामने आई है. वेंचर कैपिटल जगत से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सिलिकॉन वैली में न्यूजीलैंड का गोल्डन वीजा अब एक तरह का स्टेटस सिंबल बन गया है.

भविष्य के लिए एक इंश्योरेंस पॉलिसी

कई निवेशक इसे केवल दूसरा पासपोर्ट नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक इंश्योरेंस पॉलिसी की तरह देख रहे हैं. यानी अगर दुनिया में कभी बड़ा आर्थिक या राजनीतिक संकट पैदा हो, तो उनके पास रहने के लिए एक सुरक्षित और स्थिर देश पहले से मौजूद हो. इस सवाल का जवाब पूरी तरह हां में नहीं दिया जा सकता. इन अरबपतियों का अधिकांश कारोबार आज भी अमेरिका में ही है. वे अमेरिका छोड़कर पूरी तरह न्यूजीलैंड नहीं जा रहे. बल्कि वे अपने लिए एक दूसरा विकल्प तैयार कर रहे हैं.

भविष्य की अनिश्चितताओं के लिए तैयारी

यानी यह अमेरिका से दूरी बनाने की कहानी कम और भविष्य की अनिश्चितताओं के लिए तैयारी ज्यादा है. हालांकि यह भी सच है कि टैक्स, राजनीतिक ध्रुवीकरण, बढ़ती सामाजिक अस्थिरता और वैश्विक तनाव जैसे मुद्दों ने दुनिया के कई संपन्न लोगों को वैकल्पिक ठिकाने तलाशने पर मजबूर किया है.

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