US China tension: अमेरिका ने नहीं, चीन की तीन दिग्गज कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है, जिनके नाम भी अब सामने आ चुके है.ब्लैकलिस्ट की कंपनियो के लिस्ट में ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा, सर्च इंजन कंपनी बैडू और दुनिया में इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी BYD शामिल हैं. अमेरिका का कहना है कि ये कंपनियां चीनी सेना की मदद कर रही हैं.
अमेरिका के रक्षा विभाग द्वारा यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब कुछ हफ्ते पहले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन जाकर वहां के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी. इस दौरान दोनों देश ने कहा था कि वे अपने रिश्तों में स्थिरता बनाए रखना चाहते हैं. जिसके बाद ट्रंप ने शी जिनपिंग को वॉशिंगटन आने का निमंत्रण भी दिया है. लेकिन अब इस नई लिस्ट सामने आने के बाद दोनों देशो के बीच तनाव बढ़ा सकता है.
पहले भी आई थी लिस्ट लेकिन…
बता दे कि पेंटागन ने यह अपडेट हुई लिस्ट महीनों बाद जारी की है. इससे पहले उसने फरवरी में एक लिस्ट जारी की थी, जो किसी कारणवश वापस ले लिया था. वहीं इस बार की नई लिस्ट भी लगभग उसी पुरानी लिस्ट जैसी है. हालांकि इस बार दो मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनियों चांगशिन मेमोरी टेक्नोलॉजीज और यांग्त्जे मेमोरी टेक्नोलॉजीज को फिर से ब्लैकलिस्ट में शामिल किया गया है, जिन्हें पहले हटा दिया गया था.
लिस्ट में शामिल कंपनियों के साथ क्या होगा?
अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद और चीन पर बनी हाउस कमेटी के प्रमुख जॉन मोलिनार का कहना है कि यह अपडेटेड लिस्ट अमेरिकी कंपनियों, सरकार और जनता के लिए एक चेतावनी है. अमेरिकी कंपनियों को इन “राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे” वाली कंपनियों के साथ व्यापार बंद कर देना चाहिए, वरना यह चीन की सैन्य ताकत बढ़ाने में मदद करेगा.
AI के क्षेत्र में काम करती हैं ये कंपनियां
बता दें कि इस लिस्ट शामिल टेक कंपनियां जैसे अलीबाबा, बैडू और टेनसेंट. टेनसेंट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के क्षेत्र में काम करती है.इस दौरान बैडू ने इस आरोप का विरोध करते हुए चीनी सोशल मीडिया पर कहा कि ये आरोप “पूरी तरह बेबुनियाद” हैं. बैडू को इस लिस्ट में शामिल करने का कोई ठोस कारण नहीं है और वे इसे पूरी तरह गलत मानते हैं. कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि बैडू को ब्लैकलिस्ट से हटाने के लिए वे सभी कानूनी कदम उठाएंगे.
साथ ही उन्होने ये भी कहा कि उसे इस ब्लैकलिस्ट में शामिल करना एक “गलती” है और उसने कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है. उसका किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या सेना से कोई संबंध नहीं है. भले इस ब्लैकलिस्ट में शामिल होने से तुरंत कानूनी असर बहुत ज्यादा नहीं पड़ता, लेकिन माना जा रहा है कि यह आगे चलकर और सख्त कार्रवाई की शुरुआत हो सकती है. बता दें कि इस लिस्ट में दवा बनाने वाली कंपनी वूशी एपटेक और स्टार्टअप यूनिट्री भी शामिल हैं, जो इंसानों जैसे दिखने वाले रोबोट बनाती है.

