ईरान से तनाव के बीच अमेरिका के वॉटर सिस्टम पर साइबर अटैक, पानी को जहरीला बनाने की कोशिश नाकाम

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Washington: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका में पानी की सप्लाई करने वाली सबसे अहम पाइपलाइनों और प्लांट्स पर हुए हैं. एक के बाद एक पूरे 7 बड़े अटैक हुए हैं. इस सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर पर 7 जगहों से साइबर अटैक किए गए. हालात इतने खराब हो गए कि कई राज्यों में वॉटर सिस्टम को बचाने के लिए ऑटोमैटिक सिस्टम बंद करके हाथों से काम संभालना पड़ा. हैकर्स ने बहुत ही चालाकी से पानी के प्लांट्स में लगे प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर्स को अपना शिकार बनाया.

पूरे शहर का पानी बंद हो सकता है

ये वो डिजिटल डिवाइसेज होते हैं जो पानी का प्रेशर, केमिकल्स की सही मात्रा और बड़े-बड़े पंपों को चलाते हैं. अगर कोई इन PLCs को हैक कर ले तो पूरे शहर का पानी बंद हो सकता है या फिर पानी में केमिकल मिलाकर उसे जहरीला बनाया जा सकता है. सरकारी मेमो के मुताबिक, हैकर्स का असली मकसद पानी का प्रेशर खत्म करके सप्लाई में जहर घोलना या उसे दूषित करना ही था.

हाई-टेक तरीका इस्तेमाल नहीं किया

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि हैकर्स ने इसके लिए कोई बहुत हाई-टेक तरीका इस्तेमाल नहीं किया. उन्होंने बस उन सिस्टम्स को ढूंढा जो इंटरनेट से सीधे जुड़े थे और जिनके पासवर्ड बहुत कमजोर थे. इस बड़े और सनसनीखेज साइबर हमले की पहली भनक मिनेसोटा राज्य से लगी. 26 और 27 जुलाई के बीच यहां के 30 से ज्यादा कम्युनिटी वॉटर सिस्टम्स को हैकर्स ने अपना निशाना बना लिया.

आनन-फानन में जांच शुरू

मिनेसोटा आईटी सर्विसेज ने जब आनन-फानन में जांच शुरू की तो पता चला कि किसी ने जानबूझकर पानी की सप्लाई कंट्रोल करने वाले सिस्टम का एक्सेस हथिया लिया था. ये आग सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं रही. महज एक हफ्ते के भीतर 7 से ज्यादा राज्यों के वॉटर और वेस्टवॉटर फैसिलिटीज इस हमले की चपेट में आ गए. एफबीआई (FBI), सीआईएसए (CISA) और पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) जैसी अमेरिका की टॉप एजेंसियां तुरंत मैदान में उतरीं. मिनेसोटा आईटी सर्विसेज की प्रवक्ता एमिली जिमर का कहना है कि मामले की जांच बहुत तेजी से चल रही है.

शहरों में पीने का पानी पूरी तरह ठप

मिनेसोटा के चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर जॉन इजराइल ने कहा कि अगर कर्मचारियों ने समझदारी दिखाते हुए तुरंत मैनुअल कंट्रोल हाथ में न लिया होता तो अमेरिका के कई शहरों में पीने का पानी पूरी तरह ठप हो जाता. अमेरिका की जांच एजेंसियां यह मान रही हैं कि इस हमले का पैटर्न ईरान के पुराने साइबर हमलों से काफी मिलता-जुलता है लेकिन सबसे बड़ा ड्रामा तब शुरू हुआ जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया. ट्रंप ने इस भयंकर अटैक का दोष सीधे तौर पर ईरान पर डालने के बजाय अपनी ही व्यवस्था पर फोड़ दिया.

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