भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापारिक समझौते को लेकर उद्योग जगत का मानना है कि अंतरिम ट्रेड डील का फ्रेमवर्क FY25-26 में निर्यात को 120 अरब डॉलर से आगे ले जाने के भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को मजबूती देगा. इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (EEPC) के मुताबिक, टैरिफ में कटौती से भारत को 2030 तक 250 बिलियन डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यात लक्ष्य की दिशा में बड़ा सहारा मिलेगा.
अमेरिका सबसे बड़ा इंजीनियरिंग बाजार: EEPC
काउंसिल ने एक बयान में कहा, “अमेरिका इंजीनियरिंग सामानों का सबसे बड़ा बाजार है. EEPC दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौते के लिए फ्रेमवर्क जारी होने का स्वागत करता है. यह फ्रेमवर्क ड्यूटी और ट्रेड बैरियर को कम करता है.” इसमें आगे कहा गया कि प्रस्तावित समझौता स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा और इंजीनियरिंग सेक्टर सहित भारतीय एक्सपोर्टर्स को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में ज्यादा मार्केट एक्सेस देगा.
टैरिफ कटौती से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
दोनों देशों के बीच हुए समझौते में यह स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 25% टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया गया है. इसके साथ ही रूस से तेल खरीद को लेकर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क भी हटा लिए गए हैं. वहीं भारत को ऑटोमोटिव पार्ट्स के लिए प्रेफरेंशियल टैरिफ रेट कोटा देने पर भी सहमति बनी है. इससे भारतीय इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट सेक्टर को अमेरिकी बाजार में अपनी खोई हुई प्रतिस्पर्धा वापस पाने में मदद मिलेगी.
MSME एक्सपोर्टर्स को बड़ा फायदा
EEPC ने कहा कि MSME इंजीनियरिंग एक्सपोर्टर्स को अमेरिका के साथ ट्रेड डील से काफी फायदा होने की उम्मीद है. EEPC इंडिया को यह भी उम्मीद है कि आगे चलकर अमेरिका द्वारा सेक्शन 232 के तहत स्टील, एल्युमीनियम, ऑटो और ऑटो कंपोनेंट्स पर लगाई गई ड्यूटी में भी कमी की जाएगी. बयान में कहा गया, “अमेरिका के साथ गहरी व्यापारिक साझेदारी दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है. एक बार जब अंतरिम डील साइन हो जाती है और एक व्यापक समझौता हो जाता है, तो भारतीय इंजीनियरिंग सेक्टर में एक्सपोर्ट ग्रोथ तेज हो सकती है.”
2030 के लक्ष्य की ओर बड़ा कदम
इससे 2030 तक 250 बिलियन डॉलर के इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट लक्ष्य को हासिल करने में अहम योगदान मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा अमेरिका-भारत संयुक्त बयान से भारतीय इंजीनयरिंग सेक्टर में भरोसा और मजबूत हुआ है. इस व्यापार समझौते के जरिए न केवल इंजीनियरिंग एक्सपोर्टर्स को कई पुराने खरीदार दोबारा मिलने की संभावना है, बल्कि नए ग्राहकों के जुड़ने से आने वाले महीनों में निर्यात वृद्धि को भी गति मिलेगी.
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