US Iran Ceasefire Tension: अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के बावजूद पश्चिम एशिया में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. तनाव अब भी बरकरार है और स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है. ईरान ने इजरायल की लेबनान में कार्रवाई को इस समझौते का उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है और साफ कहा है कि उसकी “उंगली अभी भी ट्रिगर पर है”.
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीजफायर का मतलब युद्ध का अंत नहीं है. देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा है कि अगर किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई होती है, तो उसका जवाब पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा. इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि क्षेत्र में शांति फिलहाल अस्थायी है और किसी भी समय हालात फिर से बिगड़ सकते हैं.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बड़ा फैसला
तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा फैसला लिया है. रिपोर्ट के अनुसार, सीजफायर के दौरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सीमित कर दी गई है.
ईरान ने तय किया है कि रोजाना अधिकतम 15 जहाजों को ही इस जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी. यह फैसला वैश्विक व्यापार और खासकर तेल सप्लाई पर बड़ा असर डाल सकता है, क्योंकि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से तेल और गैस की आपूर्ति करता है.
इसके अलावा एक प्रस्ताव पर भी चर्चा चल रही है, जिसमें ईरान और ओमान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूल सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो यह वैश्विक व्यापार के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकताबढ़ाएगहो सकता है.
बातचीत के साथ सख्त संदेश
ईरान ने जहां एक ओर सीजफायर को स्वीकार किया है, वहीं दूसरी ओर उसने सख्त रुख भी बरकरार रखा है. ईरान ने कहा है कि वह शुक्रवार से इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करेगा, लेकिन यह कदम केवल बातचीत के लिए है, न कि युद्ध समाप्त करने के संकेत के तौर पर.
दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने तेवर कुछ नरम किए हैं. उन्होंने कहा है कि अगर ईरान सीजफायर का पालन करता है और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलता है, तो अमेरिका हमलों को आगे नहीं बढ़ाएगा.
चीन की भूमिका भी अहम
इस पूरे घटनाक्रम में चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. चीन ने पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देशों के माध्यम से ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है.
हालांकि, इसके बावजूद हालात पूरी तरह स्थिर नहीं हैं. कुछ क्षेत्रों में मिसाइल अलर्ट की खबरें सामने आई हैं और ईरान से जुड़े हमलों की घटनाएं भी जारी रही हैं, जिससे सीजफायर की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
अभी भी बना हुआ है खतरा
सीजफायर के बावजूद जिस तरह के बयान सामने आ रहे हैं और समुद्री मार्गों पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, उससे साफ है कि क्षेत्र में तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहता है या हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, व्यापार और अर्थव्यवस्था पर साफ देखने को मिल सकता है.

