अमेरिका ने ईरान पर कसा शिकंजा, ईरानी पोर्ट से आने-जाने वाले जहाजों को करेगा ब्लॉक

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

US Iran conflict: अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर प्रोग्राम समेत अन्य जरूरी मुद्दों पर बात नहीं बनी, जिसकी वजह से तनाव और बढ़ गया है. ऐसे में ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका 13 अप्रैल से ईरानी पोर्ट्स में आने-जाने वाले जहाजों पर पूरी 4तरह से समुद्री नाकाबंदी लागू करना शुरू करेगा. यूएस सेंट्रल कमांड (सीईएनटीसीओएम) ने यह कदम राष्ट्रपति के आदेश के बाद उठाया है और यह ईरानी पोर्ट्स में आने-जाने वाले सभी समुद्री ट्रैफिक को टारगेट करेगा, जिसमें अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के किनारे के पोर्ट्स भी शामिल हैं.

सीईएनटीसीओएम ने कहा कि “यह ब्लॉकेड सभी देशों के जहाजों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के लागू किया जाएगा. अमेरिकी सेना होर्मुज स्ट्रेट से गैर-ईरानी पोर्ट्स से आने-जाने वाले जहाजों को नहीं रोकेगी.” सीईएनटीसीओएम की एक रिलीज के मुताबिक, यह ब्लॉकेड सोमवार को शाम 7.30 बजे आईएसटी से शुरू होगा. कमर्शियल नाविकों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक नेविगेशन चेतावनियों पर नजर रखें और इस इलाके में काम करते समय अमेरिकी नेवी फोर्स के संपर्क में रहें.

ईरानी पोर्ट से आने-जाने वाले जहाजों को ब्लॉक करेगा अमेरिका

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दूसरे मोर्चों पर प्रोग्रेस के बावजूद, ईरान के साथ बातचीत उसके न्यूक्लियर लक्ष्यों को लेकर रुक गई है. ट्रंप के इस बयान के कुछ घंटे बाद ही सीईएनटीसीओएम का ये रिलीज सामने आया है. ट्रंप ने कहा कि “ज्यादातर बातों पर सहमति हो गई थी, लेकिन एकमात्र बात जो सच में मायने रखती थी, वो थी न्यूक्लियर और उस पर कोई सहमति नहीं बनी. यूएस नेवी होर्मुज स्ट्रेट में आने या जाने की कोशिश करने वाले सभी जहाजों को ब्लॉक करने का प्रक्रिया शुरू करेगी.” उन्होंने ईरान पर स्ट्रेट में नेवल माइंस की धमकियों का फायदा उठाकर वर्ल्ड एक्सटॉर्शन करने का आरोप लगाया.

होर्मुज स्ट्रेट एक जरूरी ग्लोबल एनर्जी कॉरिडोर

बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट एक जरूरी ग्लोबल एनर्जी कॉरिडोर है. इसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि “जो कोई भी गैर-कानूनी टोल देता है, उसे खुले समुद्र में सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा. अमेरिकी सेना स्ट्रेट्स में ईरानियों द्वारा बिछाई गई माइंस को भी खत्म करना शुरू कर देगी.” हालांकि, ईरान ने इसका तीखा विरोध किया, जिससे पता चलता है कि ब्लॉकेड की वजह से लगभग आखिरी बातचीत पटरी से उतर गई.

युद्ध खत्म करने की नीयत से तेरहान ने किया काम

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अच्छी नीयत से काम किया था और ब्लॉकेड का सामना करने से पहले वह एक समझौते से बस कुछ इंच दूर था. उन्होंने कहा कि “अच्छी नीयत से अच्छी नीयत पैदा होती है. दुश्मनी से दुश्मनी पैदा होती है.” इस झगड़े पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि यह झगड़ा ईरान के होर्मुज स्ट्रेट में नेवल माइंस के आस-पास की अनिश्चितता का इस्तेमाल करके ग्लोबल शिपिंग पर दबाव डालने पर है.

ईरान द्वारा कुछ प्रमुख समुद्री मार्गों को “खतरनाक क्षेत्र” घोषित करने के बाद जहाजों को अपनी सामान्य और सुरक्षित शिपिंग लेन छोड़नी पड़ी. परिणामस्वरूप उन्हें मजबूरन ईरान के नियंत्रण वाले जलक्षेत्र में प्रवेश करना पड़ा. इसके बाद इन जहाजों पर प्रोटेक्शन फीस भी लगाई गई. समूह ने कहा कि “यह प्रोटेक्शन फीस समुद्री कानून के तहत गैर-कानूनी है. स्ट्रेट से सटा कोई भी राज्य इंटरनेशनल कन्वेंशन के तहत आने-जाने पर रोक नहीं लगा सकता या फीस नहीं ले सकता.”

माइंस के खतरे से बढी शिपिंग इंश्योरेंस की लागत

विश्लेषकों ने कहा कि माइंस के खतरे ने तेल की कीमतों और शिपिंग इंश्योरेंस की लागत बढ़ा दी है, भले ही सीधे हमले न हुए हों. यूएस नेवी ने उस स्ट्रैटेजी का मुकाबला करने के लिए ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं. यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन और यूएसएस माइकल मर्फी जैसे डिस्ट्रॉयर ने सेफ पैसेज दिखाने और माइन-क्लियरिंग की कोशिशें शुरू करने के लिए स्ट्रेट को पार किया है. सीईएनटीसीओएम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि सुरक्षित मार्ग को जितनी जल्दी हो सके सिविलियन शिपिंग के साथ शेयर किया जाएगा.

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