इस्लामाबाद में US-ईरान-पाकिस्तान के बीच वार्ता जारी, ट्रंप बोले— ‘नतीजा कुछ भी हो, जीत हमारी ही होगी’

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

अमेरिका इस समय पाकिस्तान और ईरान के साथ इस्लामाबाद में उच्च स्तर की त्रिपक्षीय वार्ता कर रहा है. यह बैठक क्षेत्रीय तनाव के बीच बेहद अहम मानी जा रही है, जहां सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर गहन चर्चा हो रही है. एक वरिष्ठ व्हाइट हाउस अधिकारी के अनुसार, यह बैठक 15 घंटे से अधिक समय से लगातार जारी है और अब भी चल रही है, जो इस वार्ता की गंभीरता और जटिलता को दर्शाता है.

अमेरिका की मजबूत प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी

इस वार्ता में अमेरिका की ओर से एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल शामिल है. इसका नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि विशेष दूत स्टीव विटकॉफ भी इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं.

उनके साथ जेरेड कुशनर और राष्ट्रीय सुरक्षा व क्षेत्रीय मामलों के विशेषज्ञों की टीम भी मौजूद है. इस टीम में वरिष्ठ सलाहकार डॉ. एंड्रयू बेकर और माइकल वेंस जैसे नाम शामिल हैं, जबकि वॉशिंगटन से भी विशेषज्ञ लगातार सहयोग कर रहे हैं.

ट्रंप का बयान (जैसा है वैसा):

डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि “जो भी हो, जीत हमारी ही होगी. हमने उस देश को पूरी तरह हरा दिया है. अब देखते हैं क्या होता है- समझौता होता है या नहीं. अमेरिका के नजरिए से हम जीत चुके हैं.” उन्होंने आगे कहा, “हम ईरान के साथ बहुत ही गहन बातचीत के दौर में हैं. नतीजे चाहे जो भी हों, जीत हमारी ही होगी. हमने उन्हें सैन्य रूप से पहले ही हरा दिया है.” साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया, “समझौता हो या न हो, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.”

रणनीतिक और आर्थिक पहलुओं पर भी फोकस

ट्रंप ने इस वार्ता को केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे आर्थिक और ऊर्जा से जुड़े मामलों से भी जोड़ा. उन्होंने कहा कि बड़े तेल टैंकर अमेरिका की ओर आ रहे हैं और उनमें तेल और गैस की आपूर्ति हो रही है, जिसे उन्होंने सकारात्मक संकेत बताया.

उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरी प्रक्रिया एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें सैन्य और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर काम किया जा रहा है.

सैन्य स्थिति पर ट्रंप के दावे

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना, वायुसेना, एयर डिफेंस सिस्टम और रडार को भारी नुकसान पहुंचाया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि वहां के कई शीर्ष नेता अब नहीं रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने बताया कि समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाने के लिए अमेरिकी सेना सक्रिय है और समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाने का काम किया जा रहा है.

निर्णायक मोड़ पर पहुंची बातचीत

इस्लामाबाद में जारी यह त्रिपक्षीय वार्ता मिडिल-ईस्ट और दक्षिण एशिया की रणनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है. हालांकि, ट्रंप के सख्त रुख के बीच यह साफ नहीं है कि इस बातचीत से कोई ठोस समझौता निकल पाएगा या नहीं.

फिलहाल दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं, जहां से आने वाला फैसला क्षेत्र की दिशा तय कर सकता है.

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