जंग में अकेला पड़ा ईरान! मदद के लिए पीछे हटे रूस और चीन, जानें क्या है वजह

US-Israel : अमेरिका और इजरायल से युद्ध में ईरान अकेला पड़ गया है. बता दें कि अमेरिका और इजरायल के भीषण हमलों के बीच उसके पुराने सहयोगी रूस और चीन सिर्फ कड़ी निंदा और UN सिक्योरिटी काउंसिल में मीटिंग की मांग तक सीमित हैं. ऐसे में सैन्य मदद या कोई बड़ा सपोर्ट नहीं मिल रहा. इसकी 4 बड़ी वजहें सामने आती हैं…

  1. सीधे जंग में नहीं कूदना चाहता रूस

रूस और ईरान दोनों देशों के बीच 2025 में रणनीतिक साझेदारी का समझौता हुआ था, लेकिन यह सैन्य गठबंधन नहीं है. यही कारण है कि रूस पर कोई कानूनी बाध्यता नहीं है. ऐसे में रूस खुद को मध्यस्थ (मीडिएटर) की भूमिका में रखना चाहता है, न कि नए फ्रंट पर जंग लड़ना. इस मामले को लेकर क्रेमलिन प्रवक्ता का कहना है कि ‘ईरान ने हमसे हथियार मांगे ही नहीं.’ माना जा रहा है कि रूस यूक्रेन जंग में पहले से फंसा है, इसलिए नया टकराव नहीं चाहता.

  1. आर्थिक हितों पर जोखिम नहीं लेना चाहता चीन

चीन ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है, लेकिन कहा जा रहा है कि सऊदी अरब और UAE जैसे गल्फ देशों से भी मजबूत आर्थिक रिश्ते हैं. अगर ईरान का खुलकर साथ दिया तो गल्फ देशों से दूरी हो सकती है. ऐसे में चीनी एक्सपर्ट युन सुन का कहना है कि ‘हमले के बाद जो भी नई लीडरशिप आएगी, चीन उसके साथ काम करने को तैयार है. बशर्ते तेल का फ्लो चले और आर्थिक हित सुरक्षित रहें.’ अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहा तो चीन को मजबूरन कुछ करना पड़ सकता है, लेकिन फिलहाल नहीं.

  1. विरोधियों के साथ भी संतुलन चाहते हैं

बता दें कि रूस और चीन ईरान के साथ-साथ उसके विरोधियों के साथ भी संतुलन चाहते हैं. ऐसा माना जा रहा है कि किसी एक पक्ष से पूरी तरह जुड़ने से अन्य पार्टनर्स नाराज हो सकते हैं. इसी वजह से दोनों देश अमेरिका से सीधा टकराव नहीं चाहते और यही कारण है कि खुलकर ईरान के साथ मैदान में नहीं उतर रहे.

  1. अमेरिका के साथ बड़ा टकराव

जानकारी के मुताबिक, सैन्य मदद देने से अमेरिका के साथ बड़ा टकराव हो सकता है, जो कि दोनों देशों के लिए महंगा पड़ सकता है. इसलिए वे कूटनीतिक बयानों, निंदा और UN में मीटिंग की मांग तक सीमित हैं. इसके साथ ही रूसी विदेश मंत्रालय का कहना है कि हमलों से तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं हैं.

सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद शुरू हमले

 बता दें कि यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ, जब दोनों देशों ने मिलकर ईरान पर बड़े हमले किए, जिसमें सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हुई. ऐसे में जवाबी कार्रवाई के दौरान ईरान ने मिसाइल और ड्रोन अटैक्स किए. लेकिन अब ईरान अकेला लड़ रहा है. माना जा रहा है कि रूस-चीन की दूरी से उसकी स्थिति और कमजोर हुई है. अगर युद्ध लंबा चला और तेल सप्लाई प्रभावित हुई तो चीन को अपनी पॉलिसी पर फिर सोचना पड़ सकता है. फिलहाल रूस और चीन सिर्फ बातें कर रहे हैं, कोई एक्शन नहीं. ईरान के लिए यह बड़ा झटका है.

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