इजरायल-अमेरिका के आगे घुटने टेकने को तैयार नहीं है मोजतबा खामेनेई, दुश्मन देश से कर दी ये मांग

Divya Rai
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Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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US Israel Iran War: एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह बार-बार दावा कर रहे हैं कि ईरान के खिलाफ 28 फरवरी से शुरू हुई जंग अपने अंतिम चरण में है और अब उसके पास जवाबी कार्रवाई की ताकत नहीं बची है. वहीं दूसरी ओर ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के तल्ख तेवरों से यह बिलकुल महसूस नहीं हो रहा कि वह इजरायल-अमेरिका के आगे घुटने टेकने को तैयार है.

दुश्मन देश से मुआवजे की मांग की

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने देश में हुए नुकसान के लिए दुश्मन देश से मुआवजे की मांग की है. उन्होंने कहा है कि हम दुश्मन से मुआवजा लेंगे. यदि वह इनकार करता है तो हम उसकी उतनी संपत्ति ले लेंगे जितनी हम तय करेंगे और अगर यह भी संभव नहीं हुआ तो हम उसकी उतनी ही संपत्ति तबाह कर देंगे. यह जानकारी सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने मोजतबा खामेनेई के टेलीग्राम अकाउंट पर किए एक पोस्ट के हवाले से दी. इससे पहले गुरुवार को मोजतबा खामेनेई ने देश के नाम अपने पहले संदेश में निरंतर प्रतिरोध का आह्वान किया.

खामेनेई ने बदला लेने की खाई कसम US Israel Iran War

एक लिखित संदेश में मोजतबा खामेनेई ने संघर्ष में मारे गए लोगों का बदला लेने की कसम खाई और जोर देकर कहा कि तेहरान अपने शहीदों के खून का बदला लेने से पीछे नहीं हटेगा. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह संदेश ईरानी सरकारी टेलीविजन पर एक महिला एंकर ने पढ़ा. इसके मुताबिक ईरान आवश्यकता पड़ने पर अन्य मोर्चे भी खोल सकता है. ईरान पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है और केवल उन्हीं ठिकानों को निशाना बनाएगा, जहां से उस पर हमले किए जाते हैं.

अमेरिकी रक्षा सचिव ने किया खामेनेई ने घायल होने का दावा

इस बीच, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने शुक्रवार को दावा किया था कि ईरान के नव नियुक्त सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई घायल हो गए हैं और उन्हें छिपने के लिए मजबूर होना पड़ा है, क्योंकि देश का सैन्य नेतृत्व तीव्र अमेरिकी हमलों के बीच संघर्ष कर रहा है. हेगसेथ ने कहा कि सैन्य अभियान जारी रहने के कारण ईरान के नेतृत्व पर दबाव बढ़ता जा रहा है.

अमेरिका ने तेहरान और अन्य ईरानी शहरों पर संयुक्त हमले किए

28 फरवरी को इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने तेहरान और अन्य ईरानी शहरों पर संयुक्त हमले किए, जिनमें ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई, वरिष्ठ सैन्य कमांडर और नागरिक मारे गए. ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मध्य पूर्व में इजराल और अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों को निशाना बनाकर मिसाइलों और ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी थी. इधर विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान अमेरिका के साथ युद्धविराम या वार्ता की मांग नहीं कर रहा है. उन्होंने कहा है कि तेहरान जब तक जरूरी हो, खुद का बचाव करने के लिए तैयार है.

ईरान ने कभी युद्धविराम की मांग नहीं की

सिन्हुआ के अनुसार, रविवार को प्रसारित सीबीएस न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में अराघची ने उन दावों को खारिज कर दिया कि ईरान ने युद्ध को समाप्त करने की कोशिश की है. उन्होंने साफ कहा कि ईरान ने कभी युद्धविराम की मांग नहीं की, और न ही हमने इस बारे में कभी बातचीत की. हम तब तक अपनी रक्षा करते रहेंगे, जब तक यह जरूरी होगा. उन्होंने कहा कि ईरान तब तक सैन्य अभियान जारी रखेगा, जब तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच जाते कि यह एक अवैध युद्ध है. अराघची ने कहा, “हमें अमेरिका से बात करने का कोई कारण नजर नहीं आता, क्योंकि जब उन्होंने हम पर हमला करने का फैसला किया था, तब हम उनसे बात कर रहे थे.”

ईरान ने इस जलमार्ग को बंद नहीं किया है

होर्मुज (US Israel Iran War) जलडमरूमध्य के बारे में मंत्री अराघची ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान ने इस जलमार्ग को बंद नहीं किया है. यह हमारे सैन्य बलों को तय करना है और उन्होंने पहले ही विभिन्न देशों के कुछ जहाजों को गुजरने की अनुमति देने का निर्णय लिया है. इसी के साथ अराघची ने दोहराया कि तेहरान ने कभी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं की. मंत्री ने खुलासा किया कि ईरान ने अमेरिका के साथ हमले से पहले हुई वार्ता में अपने संवर्धित यूरेनियम को कम करने पर सहमति जताई थी, लेकिन परमाणु संयंत्रों पर हुए हमलों के बाद अब वह संवर्धित सामग्री मलबे के नीचे दब गई है. उन्होंने बताया कि ईरान की फिलहाल क्षतिग्रस्त स्थलों से संवर्धित यूरेनियम के भंडार को पुनः प्राप्त करने की कोई योजना नहीं है.

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