ईरान जंग के बीच अमेरिकी मरीन की एंट्री, USS पोर्टलैंड बदल सकते हैं युद्ध की तस्वीर

US Military In Middle East : मिडिल ईस्‍ट में जारी जंग के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत तेजी से बढ़ानी शुरू कर दी है. ईरान के साथ जारी टकराव के बीच हजारों अमेरिकी सैनिक और कई बड़े युद्धपोत क्षेत्र में भेजे जा रहे हैं. रिपोर्ट का कहना है कि करीब 2,200 से 2,500 मरीन सैनिक 11th Marine Expeditionary Unit के तहत USS बॉक्सर के साथ तैनात किए जा रहे हैं. बता दें कि इससे पहले से मौजूद करीब 50,000 अमेरिकी सैनिकों के अलावा अब हजारों और सैनिक इस क्षेत्र में बढ़ सकते हैं.

इस मामले को लेकर मीडिया रिपोर्ट का कहना है कि अमेरिका की ओर से ये कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ बड़ा जंग शुरू किया है. ऐसे में दोनों पक्षों के बीच बड़े स्तर पर ड्रोन और मिसाइल से लगातार हमले हो रहे हैं. विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थिति तनावपूर्ण है, जो कि दुनिया के तेल व्यापार का करीब 20% हिस्सा संभालता है. प्राप्‍त जानकारी के अनुसार यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है. ऐसे में अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह अतिरिक्त सेना कई कामों के लिए तैयार रखी जा रही है जैसे जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित निकालना, समुद्री रास्तों की सुरक्षा करना और जरूरत होने पर जमीन पर कार्रवाई करना.

USS बॉक्सर एक बड़ा युद्धपोत

जानकारी के मुताबिक, USS बॉक्सर एक बड़ा युद्धपोत है जिसे एक तरह से छोटा एयरक्राफ्ट कैरियर भी माना जाता है. इसमें F-35B फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर और MV-22 Osprey जैसे विमान तैनात किए जा सकते हैं. इसके क्षमता की बात करें तो यह जहाज 2000 से ज्यादा सैनिकों को लेकर चल सकता है और सीधे समुद्र से जमीन पर हमला करने की क्षमता रखता है.

USS पोर्टलैंड की भूमिका

इसके साथ ही USS पोर्टलैंड का काम सैनिकों, गाड़ियों और जरूरी सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना है. इतना ही नही बल्कि यह 800 से ज्यादा सैनिकों और भारी उपकरणों को ले जा सकता है और लंबे समय तक ऑपरेशन को सपोर्ट करता है.

जमीन पर ऑपरेशन करने में सक्षम

बता दें कि USS कॉम्स्टॉक खास तौर पर समुद्र से जमीन पर उतरने वाले ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल होता है. यह लैंडिंग क्राफ्ट और अन्य सैन्य उपकरणों को लॉन्च करने में मदद करता है और तटीय इलाकों में सेना को उतारने में अहम भूमिका निभाता है. इसके साथ ही इन तीनों जहाजों को मिलाकर एक मजबूत Amphibious Ready Group बनता है, जो कि हवाई हमले, सैनिकों की तैनाती और जमीन पर ऑपरेशन करने में सक्षम होता है.

समुद्री इलाकों में सक्रिय एयरक्राफ्ट कैरियर

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार इसके अलावा USS त्रिपोली भी क्षेत्र में मौजूद है, जो इंडो-पैसिफिक से आई 31st Marine यूनिट को लेकर आया है. जानकारी के मुताबिक, USS अब्राहम लिंकन और USS गेराल्ड आर. फोर्ड जैसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर भी आसपास के समुद्री इलाकों में सक्रिय हैं. इस दौरान मिडिल ईस्ट में अमेरिका की यह बढ़ती सैन्य मौजूदगी दिखाती है कि हालात काफी गंभीर हैं. अगर तनाव और बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ इस क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है.

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