ब्रिटेन ने कश्मीर पर दिया जवाब, बोला-यह भारत-पाक का फैसला, कश्मीरियों की इच्छाओं पर हल करने का मुद्दा

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London: कश्मीर को लेकर अपनी दीर्घकालिक नीति की पुष्टि की है. ब्रिटेन में इस सप्ताह संसद के वेस्टमिंस्टर हॉल में हुई बहस के दौरान कहा कि यह भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीरियों की इच्छाओं के आधार पर हल करने का मुद्दा है. विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (एफसीडीओ) के मंत्री हामिश फाल्कनर ने पाकिस्तानी मूल के लेबर सांसद इमरान हुसैन द्वारा प्रस्तावित कश्मीर- आत्मनिर्णय शीर्षक वाली बहस के दौरान आधिकारिक रुख प्रस्तुत किया.

क्या कश्मीर एक द्विपक्षीय या एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा?

ब्रिटिश-पाकिस्तानी मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या वाले ब्रैडफोर्ड ईस्ट के सांसद ने मंत्री से एक महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर देने के लिए कहा कि क्या कश्मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है या एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा? फाल्कनर ने कहा कि मैं कश्मीर पर ब्रिटेन सरकार के लंबे समय से जारी रुख की पुष्टि करता हूं, जो यह है कि कश्मीरी लोगों की इच्छाओं को ध्यान में रखते हुए, इस स्थिति का स्थायी समाधान ढूंढ़ना भारत और पाकिस्तान का काम है.

भारत के पड़ोसी पर तीखा हमला

बता दें कि इससे पहले इसी साल 4 जून को ब्रिटेन के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने पाकिस्तान को एक असफल राज्य (फेल्ड स्टेट) करार देते हुए भारत के पड़ोसी पर तीखा हमला बोला था. उन्होंने सवाल किया कि क्या पाकिस्तान में लोकतंत्र है या कंट्रोल सेना के जनरलों के हाथ में है? उन्होंने पाकिस्तान के शासन में देश के अनियंत्रित सैन्य प्रभाव का भी जिक्र किया था.

भारत के साथ खड़े होने का आग्रह

लंदन में बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद यूके के सांसद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ खड़े होने का आग्रह किया था. उन्होंने संप्रभु भारतीय क्षेत्र में आतंकवाद को बढ़ावा देने और जम्मू-कश्मीर पर उसके अवैध कब्जे के लिए पाकिस्तान की तीखी आलोचना भी की थी.

आतंक के पनाह देने वाले पाकिस्तान की आलोचना

उन्होंने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को कमजोर करने वाले आतंक के पनाह देने वाले इस देश की आलोचना की. साथ ही 1947 के इरादे के अनुसार पूरे जम्मू और कश्मीर को भारत के कंट्रोल में देने का आह्वान किया. उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान एक विफल देश है. पाकिस्तान में लोकतंत्र नहीं है. हमारे पास पाकिस्तान के कुछ हिस्सों के लोग हैं, जो पाकिस्तानी सैन्य शासन के तहत पीड़ित हैं. तो कंट्रोल किसके हाथ में है? क्या यह लोकतंत्र है या जनरलों के हाथ में कंट्रोल है? और यह बिल्कुल स्पष्ट है कि आतंकवाद को पाकिस्तान से संप्रभु भारत में प्रोत्साहित किया जाता है.

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