Venezuela Earthquake Satellite Change: 24 जून को उत्तरी वेनेजुएला में आए दो भीषण भूकंपों ने हजारों लोगों की जान ली, बड़ी से बड़ी इमारतों को बर्बाद कर दिया. यहां तक की इसने धरती की सतह को भी बदलकर रख दिया. जी हां, दरअसल NASA और ISRO के संयुक्त मिशन NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) ने इस तबाही की ऐसी तस्वीरें और आंकड़े जारी किए हैं, जिन्होंने वैज्ञानिकों को भी चौंका दिया है.
आंकड़ों के मुताबिक, भूकंप के बाद कुछ इलाकों में जमीन करीब 60 सेंटीमीटर (लगभग 2 फीट) तक अपनी जगह से खिसक गई. बता दें कि यह पहली बार है जब NISAR ने किसी बड़े प्राकृतिक हादसे में अपने अर्जेंट रिस्पॉन्स ऑब्जर्वेशन सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए आपदा के तुरंत बाद विस्तृत रडार डेटा जुटाया.
दो बड़े भूकंपों ने हिलाकर रख दिया
बता दें कि 24 जून को उत्तरी वेनेजुएला में पहले 7.2 तीव्रता का भूकंप आया था. इसके महज 39 सेकेंड बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा झटका लगा. इन दोनों भूकंपों ने पूरे भयानक तबाही मचाई. इस दौरान 5,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जबकि 16,700 से ज्यादा लोग घायल हुए. राजधानी कराकास और ला गुआइरा शहर सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहे.
सैटेलाइट ने कैसे पकड़ा धरती की खिसकना?
यह NISAR मिशन की पहली बड़ी आपदा प्रतिक्रिया मानी जा रही है. भूकंप के तुरंत बाद सैटेलाइट ने प्रभावित इलाके की रडार इमेजिंग शुरू की. ऐसे में वैज्ञानिकों ने भूकंप से पहले और बाद में ली गई तस्वीरों की तुलना कर यह पता लगाया कि धरती की सतह में कहां और कितना बदलाव हुआ. NISAR ने InSAR (Interferometric Synthetic Aperture Radar) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया.
यह टेक्नोलॉजी धरती की सतह में मिलीमीटर स्तर पर होने वाले बदलाव को भी माप सकती है. अलग-अलग समय पर ली गई रडार तस्वीरों की तुलना से वैज्ञानिकों ने देखा कि कई इलाकों में जमीन अपनी पुरानी स्थिति से काफी दूर खिसक चुकी थी.
एक तरफ सरकी धरती
NISAR से मिले आंकड़े अब अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) और दूसरे वैज्ञानिक संस्थानों के लिए बेहद अहम साबित हो रहे हैं, जिनकी मदद से वैज्ञानिक यह समझ पाएंगे कि किस फॉल्ट लाइन में कितना तनाव बचा है और भविष्य में आफ्टरशॉक या नए भूकंप का खतरा किन इलाकों में ज्यादा हो सकता है.