New Delhi: अमेरिका के साथ एक साल पहले अपने संबंधों को सर्वोच्च कूटनीतिक स्तर पर बढ़ाने वाले वियतनाम को बडा झटका लगा है. वियतनाम सेना के एक आंतरिक दस्तावेज़ में अमेरिका के संभावित आक्रामक युद्ध की तैयारी को लेकर खुलासा हुआ है. मंगलवार को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका को एक युद्धकारी शक्ति बताया गया है. हालांकि, अमेरिकी राज्य विभाग ने इस दस्तावेज़ पर टिप्पणी नहीं की है.
चीन वियतनाम का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार
दस्तावेज़ में चीन को क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी माना गया है लेकिन अमेरिका की तरह अस्तित्वगत खतरा नहीं. चीन वियतनाम का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है जबकि अमेरिका वियतनाम का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है. इस कारण हनोई को आर्थिक-राजनीतिक संतुलन बनाकर चलना पड़ता है. दस्तावेज़ में यह भी संकेत मिलता है कि वियतनाम सरकार को यह डर है कि बाहरी ताकतें कलर रिवोल्यूशन जैसे जन-आंदोलन को भड़काकर कम्युनिस्ट नेतृत्व को गिराने की कोशिश कर सकती हैं.
पूरे प्रशासन में एक साझा चिंता
द 88 प्रोजेक्ट नामक मानवाधिकार संगठन द्वारा जारी रिपोर्ट में इस दस्तावेज़ को दूसरी अमेरिकी आक्रमण योजना नाम दिया गया है. संगठन ने कहा कि यह सिर्फ अलग-अलग सरकार की सोच नहीं बल्कि पूरे प्रशासन में एक साझा चिंता है. इस दस्तावेज़ को वियतनाम के रक्षा मंत्रालय ने अगस्त 2024 में तैयार किया था. इसमें लिखा है कि अमेरिका चीन के खिलाफ निवारक शक्ति बढ़ाने के लिए असामान्य युद्ध और बड़े पैमाने पर सैन्य हस्तक्षेप तक कर सकता है.
फिलहाल वियतनाम पर युद्ध का कम जोखिम
हालांकि दस्तावेज़ में यह भी कहा गया है कि फिलहाल वियतनाम पर युद्ध का कम जोखिम है लेकिन अमेरिकी युद्धकारी प्रकृति के कारण सतर्क रहने की जरूरत है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिकी प्रशासन चीन के खिलाफ एशियाई देशों के साथ सैन्य और रणनीतिक रिश्ते बढ़ा रहा है, जिससे एक मोर्चा बनता जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की दूसरी अवधि में कुछ चिंताएं कम हुईं लेकिन उनके प्रशासन की क्यूबा और वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई ने वियतनामी कंजरवेटिवों में अमेरिका के प्रति अनिश्चितता बढ़ाई है.
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