Wular Barrage Project : ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के संबंधों में तनाव बढ़ गया था और इसी के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया. इस मामले को लेकर सरकार ने स्पष्ट करते हुए कहा कि यह संधि शांति के समय के लिए थी और अगर पाकिस्तान शांति बनाए रखने को तैयार नहीं है तो समझौते की समीक्षा की जा सकती है. बता दें कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने चार दशक से बंद पड़ी वुलर बैराज परियोजना, जिसे तुलबुल परियोजना भी कहा जाता है. उसे दोबारा शुरू करने की तैयारी की है. इसके साथ ही इस परियोजना का मकसद झेलम नदी के पानी को स्टोर करना और उसके फ्लो को नियंत्रित करना है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वुलर बैराज परियोजना को पहले सिंधु जल संधि के प्रावधानों के कारण रोक दिया गया था. इतना ही नही बल्कि इस योजना के लिए एशियाई बैंक से फंडिंग भी ली गई थी, लेकिन कुछ ही समय बाद इसका काम ठप हो गया. ऐसे में इस समय जब संधि निलंबित हो चुकी है तो उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार केंद्र के साथ मिलकर इसे आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है. इसे लेकर अधिकारियों का कहना है कि केंद्र और प्रदेश सरकार जल्द ही इस पर संयुक्त रूप से काम शुरू करेंगी. इनमें अखनूर में चेनाब नदी से जम्मू शहर को जलापूर्ति और झेलम पर तुलबुल परियोजना शामिल है.
वुलर झील की वर्तमान स्थिति
प्राप्त जानकारी के अनुसार वुलर झील का आकार झेलम नदी के प्रवाह के अनुसार बदलता रहता है. बता दें कि इसका न्यूनतम क्षेत्रफल लगभग 20 वर्ग किलोमीटर और अधिकतम करीब 190 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाता है. बताया जा रहा है कि सर्दियों में झेलम का जल प्रवाह कम होने से झील के कई हिस्से सूख जाते हैं. इसकी वजह से स्थानीय लोगों को काफी परेशानी होती है. इससे स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित होती है.
झील के सिकुड़ने से स्थानीय लोगों पर प्रभाव
इसके साथ ही बांदीपोरा से लेकर सोपोर तक सैकड़ों लोग मछली पकड़ने, सिंघाड़ा और कमल ककड़ी निकालने के लिए इस झील पर निर्भर हैं. बता दें कि इस झील के सिकुड़ने से उनकी आय पर भी असर पड़ा है. लोगों का कहना है कि अगर वुलर बैराज परियोजना फिर से शुरू होती है तो जल भंडारण बेहतर होगा और उनकी पारंपरिक आजीविका को सहारा मिलेगा.
संधि निलंबन के बाद पाकिस्तान का बयान
ऐसे में सिंधु जल संधि निलंबन के बाद पाकिस्तान की ओर से लगातार बयान दिए गए हैं. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पानी रोका गया तो इसे युद्ध जैसा कदम माना जाएगा. लेकिन उनकी गीदड़भभकी के बाद भी भारत अपनी बात पर कायम रहा. अब केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से वुलर बैराज परियोजना को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है.
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