Munich: डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा है कि ग्रीनलैंड के लोग बिल्कुल साफ हैं, वे अमेरिकी नहीं बनना चाहते. जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को हासिल करने की जिद पर अड़े हुए हैं. फ्रेडरिक्सन ने ये भी कहा कि ट्रंप की इच्छा में कोई बदलाव नहीं आया है. बता दें कि ट्रंप के इस फैसले से पूरे यूरोप में कड़ी नाराजगी है.
नाटो सहयोगियों के बीच चिंता का विषय
यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, विशेष रूप से नाटो सहयोगियों के बीच, आलोचना और चिंता का विषय बना हुआ है. फ्रेडरिक्सन ने यह टिप्पणी म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के एक पैनल में की. फ्रेडरिक्सन ने स्पष्ट कहा कि हमें संप्रभु देशों की रक्षा करनी होगी और लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार की भी.
अमेरिका-डेनमार्क-ग्रीनलैंड का एक कार्यसमूह
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आर्कटिक में अमेरिकी सुरक्षा चिंताओं को लेकर अमेरिका-डेनमार्क-ग्रीनलैंड का एक कार्यसमूह बनाया गया है. फ्रेडरिक्सन ने कहा कि समाधान खोजने की कोशिश होगी लेकिन कुछ रेड लाइन हैं जिन्हें पार नहीं किया जाएगा. हालांकि दावोस में हुई बातचीत में ट्रंप ने ग्रीनलैंड को सैन्य बल से लेने से इनकार किया, जिससे सशस्त्र कब्जे की आशंकाएं कम हुई हैं.
टैरिफ लगाने की धमकी भी ले ली वापस
इसके अलावा ट्रंप ने नाटो के महासचिव मार्क रुट्टे से मुलाकात के बाद ग्रीनलैंड मुद्दे पर आठ यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी भी वापस ले ली. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि रूस और चीन को ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने से रोकने के लिए, उनका डेनमार्क के इस स्वायत्त इलाक़े का अधिग्रहण करना ज़रूरी है.
ग्रीनलैंड, डेनमार्क के अधीन एक स्वशासित क्षेत्र
ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप, डेनमार्क के अधीन एक स्वशासित क्षेत्र है, जहां रक्षा और विदेश नीति कोपेनहेगन के नियंत्रण में हैं. 2025 में सत्ता में लौटने के बाद से ट्रंप बार-बार ग्रीनलैंड को हासिल करने की बात दोहरा चुके हैं, जिस पर पूरे यूरोप में कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली है.
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