जेल में बंद यासीन मलिक ने पाकिस्तानी पत्नी से तोड़ा रिश्ता, दाखिल किया 25 पन्नों का निजी हलफनामा

New Delhi: दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक से अपना वैवाहिक रिश्ता खत्म करने का बड़ा फैसला लिया है. हत्या के एक मामले में जम्मू की टाडा/पोटा विशेष अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान मलिक ने 25 पन्नों का एक बेहद भावुक और निजी हलफनामा दाखिल किया. इस हलफनामे के जरिए उसने अपने जीवन के तीन सबसे करीबी लोगों– अपनी मां, पत्नी मुशाल और 13 साल की बेटी रजिया सुल्ताना को अपना अंतिम संदेश भेजा है.

अपनी पत्नी की आवाज तक नहीं सुनी

यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर में टेरर-फ़ंडिंग के मामले में 2019 से जेल में हैं और बाद में मई 2022 में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. अदालत में पेश दस्तावेज में यासीन मलिक ने मुशाल का जिक्र करते हुए लिखा कि बीते आठ सालों से उसने अपनी पत्नी की आवाज तक नहीं सुनी है. इस लंबे अरसे के दौरान उसे न तो फोन पर बात करने की इजाजत मिली और न ही वीडियो कॉल के जरिए संपर्क करने दिया गया. लंबे अलगाव और कानूनी बंदिशों का हवाला देते हुए उसने अपनी शादी को यहीं खत्म करने का एलान किया है.

आवाज सुने हुए आठ साल हो गए

उन्होंने मुशाल को लिखा कि उन्हें उनकी आवाज सुने हुए आठ साल हो गए हैं. इस दौरान उन्हें न तो फोन पर बात करने की इजाजत मिली और न ही वीडियो कॉल पर उनसे मिलने की. शादी से अलग होने का फैसला क्यों किया? यह बताते हुए मलिक ने लिखा, कि मैं नहीं चाहता कि मुशाल अपनी बची हुई जिंदगी इन हालात के बोझ तले या किसी विधवा की तरह जिए. मैं चाहता हूं कि वह सम्मान और उम्मीद के साथ अपनी जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू करे.

पत्नी को शादी के बंधन से आजाद करने का बेहद दर्दनाक फैसला

फांसी या कई और साल जेल में बिताने की आशंका के बीच, मलिक ने कहा कि उन्होंने अपनी पत्नी को शादी के बंधन से आजाद करने का बेहद दर्दनाक फैसला लिया है, ताकि उन्हें उस चिंता और अनिश्चितता में न जीना पड़े जो अब उनकी अपनी किस्मत बन गई है. अपनी बेटी रजिया के लिए उनका संदेश कुछ यूं था. उन्होंने उससे कहा कि वह अपनी दादी के करीब रहे और उन्हें रोज फोन करे, भले ही सिर्फ पांच मिनट के लिए, ताकि इस मुश्किल समय में दादी को उसका प्यार और साथ महसूस होता रहे.

अंतरात्मा की अंतिम आवाज

यासीन मलिक ने साफ कहा कि यह हलफनामा दया या सहानुभूति पाने के लिए नहीं लिखा गया था. इसके बजाय, उन्होंने इसे अपनी अंतरात्मा की अंतिम आवाज बताया. इसके कुछ ही समय बाद, रजिया ने एक वीडियो में जवाब दिया कि अगर उनके पिता सच में तलाक लेते हैं, तो वह अपनी जान दे देगी. इस हलफनामे और उस पर रजिया की प्रतिक्रिया ने एक कानूनी लड़ाई में मानवीय पहलू जोड़ दिया है, जो सालों से ज्यादातर अदालतों और टेरर चार्ज की भाषा में लड़ी जा रही थी.

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