FPI ने भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर दिखाई सक्रियता

Shivam
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भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अक्टूबर महीने की शुरुआत में एक बार फिर से सक्रियता दिखाई है और अब तक 3,300 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध निवेश किया है. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने 10 अक्टूबर तक भारतीय शेयर बाजार में कुल 3,358 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिसमें इक्विटी, डेट, हाइब्रिड और म्यूचुअल फंड जैसे क्षेत्रों में पूंजी लगाई गई है. जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार का कहना है कि एफपीआई द्वारा अपनाई गई नई ट्रेडिंग रणनीति एक अहम बदलाव को दर्शाती है, जिसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं.
पहला – भारत और अन्य बाजारों के बीच वैल्यूएशन गैप, जो पहले अधिक था, लेकिन हाल के हफ्तों में अन्य बाजारों में तेजी और भारतीय बाजार में समेकन के बाद काफी कम हो गया है. दूसरा- बाजार विशेषज्ञों ने भारत के विकास और आय की संभावनाओं को बढ़ा दिया है. जीएसटी में कटौती और कम ब्याज दर के चलते वित्त वर्ष 27 में भारतीय कंपनियों की आय में बढ़ोतरी की उम्मीद है. 10 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह के अंतिम चार कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों कैश मार्केट में शुद्ध खरीदार रहे. पिछले चार कारोबारी सत्रों के दौरान कैश मार्केट में खरीदारी का आंकड़ा 3,289 करोड़ रुपए था.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आयात पर 100 प्रतिशत टैक्स लगाने और चीन को कुछ जरूरी अमेरिकी चीजें भेजने पर रोक लगाने की धमकी दी है. इसके चलते अमेरिका और चीन के बीच फिर से व्यापार विवाद शुरू हो गया है, जिससे दुनिया भर के बाजारों में चिंता बढ़ गई है. विश्लेषकों का कहना है कि आगे चलकर एफपीआई का प्रवाह इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले दिनों में यह नया व्यापार युद्ध किस तरह आगे बढ़ता है. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के रिसर्च हेड (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि पिछले शुक्रवार को निफ्टी 104 अंक बढ़कर 25,285 पर बंद हुआ.
इसकी वजह वैश्विक धारणा में सुधार था, जिसे इजराइल और हमास द्वारा युद्धविराम योजना के पहले चरण पर सहमति बनने से भू-राजनीतिक तनाव कम होने और संभावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में प्रगति के संकेतों से सपोर्ट मिला. उन्होंने कहा, नए सिरे से एफपीआई खरीदारी ने भी सकारात्मक धारणा को बढ़ावा दिया. इसके अलावा, भारत और ब्रिटेन ने शिक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, जलवायु परिवर्तन और रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में कई सहयोगों की घोषणा की है, यह बाजार के लिए सकारात्मक है.
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