राष्ट्रपति मुर्मू ने संथाली भाषा में जारी किया भारत का संविधान, समुदाय के लिए बताया गर्व और खुशी की बात

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New Delhi: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संथाली भाषा में भारत का संविधान जारी किया है. गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में मौके पर द्रौपदी मुर्मू के साथ उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी मौजूद रहे. इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि यह सभी संथाली लोगों के लिए गर्व और खुशी की बात है कि भारत का संविधान अब संथाली भाषा में ओल चिकी लिपि में उपलब्ध है.

अपनी भाषा में पढ़ और समझ सकेंगे

इससे वे संविधान को अपनी भाषा में पढ़ और समझ सकेंगे. राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि इस वर्ष हम ओल चिकी लिपि की शताब्दी मना रहे हैं. उन्होंने विधि एवं न्याय मंत्री और उनकी टीम की प्रशंसा की, जिन्होंने शताब्दी वर्ष में भारत के संविधान को ओल चिकी लिपि में प्रकाशित करवाया. भारत के राष्ट्रपति के आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट में बताया गया कि अलचिकि लिपि में लिखित संताली भाषा में भारत के संविधान का लोकार्पण करते हुए मुझे हार्दिक प्रसन्‍नता हो रही है.

भारत का संविधान संताली भाषा में प्रकाशित

यह हमारे लिए गौरव एवं प्रसन्नता की बात है कि भारत का संविधान संताली भाषा में प्रकाशित हुआ है. पोस्ट में आगे लिखा गया कि संताली भाषा में संविधान का उपलब्ध होना समस्त संताली समुदाय के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है. ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार में रहने वाले सभी संताली लोग अपनी मातृभाषा एवं लिपि में लिखे गए संविधान को पूरी तरह जान सकेंगे.

संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल

संविधान के अनुच्छेदों को वे ठीक से समझ सकेंगे. संथाली भाषा जिसे 2003 के 92वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था. भारत की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक है. यह झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में बड़ी संख्या में आदिवासी लोगों द्वारा बोली जाती है.

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