02 January 2025 Ka Panchang: हिंदू धर्म में किसी भी कार्य को करने से पहले शुभ और अशुभ मुहूर्त देखा जाता है. ज्योतिष हिंदू पंचांग से रोजाना शुभ अशुभ मुहूर्त राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की वर्तमान स्थिति के बारे में बताते हैं. आइए काशी के ज्योतिष से जानते हैं 02 जनवरी, दिन शुक्रवार का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त के समय के बारे में…
आज का पंचांग
02 जनवरी 2026 को पौष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है. इस दिन मृगशिरा नक्षत्र और शुक्ल योग का संयोग बन रहा है. शुक्रवार के दिन का शुभ मुहूर्त अभिजीत 12:04 से 12:45 तक रहेगा. राहुकाल दोपहर 11:07 से 12:25 तक रहेगा. इस दिन चंद्रमा मिथुन राशि में गोचर करेंगे.
| तिथि | चतुर्दशी | 18:53 तक |
| नक्षत्र | मृगशिर्षा | 20:03 तक |
| प्रथम करण | गर | 08:37 तक |
| द्वितीय करण | वणिज | 18:53 तक |
| पक्ष | शुक्ल | |
| वार | शुक्रवार | |
| योग | शुभा | 17:04 तक |
| सूर्योदय | 07:14 | |
| सूर्यास्त | 17:35 | |
| चंद्रमा | मिथुन | |
| राहुकाल | 11:07-12:25 | |
| विक्रमी संवत् | 2082 | |
| शक संवत | 1947 | विश्वावसु |
| मास | पौष | |
| शुभ मुहूर्त | अभिजीत | 12:04-12:45 |
पंचांग के पांच अंग
तिथि: हिंदू काल गणना के अनुसार, जब चंद्रमा अपनी स्थिति (चन्द्र रेखांक) से सूर्य की स्थिति (सूर्य रेखांक) तक 12 अंश आगे बढ़ता है, उस समय को तिथि कहा जाता है. एक महीने में कुल तीस तिथियाँ होती हैं, जिन्हें दो पक्षों में बाँटा गया है। शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या कहते हैंऋ
तिथि के नाम- प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या/पूर्णिमा।
नक्षत्र: आकाश मंडल में एक तारा समूह को नक्षत्र कहा जाता है। इसमें 27 नक्षत्र होते हैं और नौ ग्रहों को इन नक्षत्रों का स्वामित्व प्राप्त है। 27 नक्षत्रों के नाम- अश्विन नक्षत्र, भरणी नक्षत्र, कृत्तिका नक्षत्र, रोहिणी नक्षत्र, मृगशिरा नक्षत्र, आर्द्रा नक्षत्र, पुनर्वसु नक्षत्र, पुष्य नक्षत्र, आश्लेषा नक्षत्र, मघा नक्षत्र, पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र, हस्त नक्षत्र, चित्रा नक्षत्र, स्वाति नक्षत्र, विशाखा नक्षत्र, अनुराधा नक्षत्र, ज्येष्ठा नक्षत्र, मूल नक्षत्र, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, श्रवण नक्षत्र, घनिष्ठा नक्षत्र, शतभिषा नक्षत्र, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, रेवती नक्षत्र.
वार: वार का आशय दिन से है. एक सप्ताह में सात वार होते हैं. ये सात वार ग्रहों के नाम से रखे गए हैं – सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार.
योग: नक्षत्र की भांति योग भी 27 प्रकार के होते हैं। सूर्य-चंद्र की विशेष दूरियों की स्थितियों को योग कहा जाता है. दूरियों के आधार पर बनने वाले 27 योगों के नाम – विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यातीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इन्द्र और वैधृति.
करण: हर तिथि में दो करण होते हैं- एक तिथि के पूर्वार्ध में और दूसरा तिथि के उत्तरार्ध में. कुल 11 प्रकार के करण होते हैं, जिनके नाम इस प्रकार हैं: बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पाद, नाग और किस्तुघ्न. विशेष रूप से, विष्टि करण को भद्रा कहा जाता है. भद्रा के समय में शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और विभिन्न जानकारियों पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

