पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) बोर्ड ने गुरुवार को नए फ्रेमवर्क को मंजूरी दे दी है. इसके तहत अब शेड्यूल कमर्शियल बैंक (एससीबी) एनपीएस को प्रबंधित करने के लिए पेंशन फंड स्थापित कर सकेंगे. इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है और एनपीएस में निवेश करने के लिए लोगों के पास अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे. वित्त मंत्रालय ने बताया कि यह प्रस्तावित ढांचा उन मौजूदा नियामक बाधाओं को दूर करने का प्रयास करता है, जिन्होंने अब तक बैंकों की भागीदारी को सीमित रखा था.
एनपीएस फंड के लिए बैंक पात्रता तय
आरबीआई के मानदंडों के अनुरूप नेट वर्थ, बाजार पूंजीकरण और विवेकपूर्ण सुदृढ़ता के आधार पर स्पष्ट रूप से परिभाषित पात्रता मानदंड लागू करके, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल अच्छी तरह से पूंजीकृत और प्रणालीगत रूप से मजबूत बैंकों को ही पेंशन फंड प्रायोजित करने की अनुमति दी जाए. बयान में कहा गया है कि विस्तृत मानदंड बाद में अधिसूचित किए जाएंगे और ये नए तथा मौजूदा दोनों पेंशन फंडों पर लागू होंगे. पीएफआरडीए द्वारा शुरू की गई चयन प्रक्रिया के तहत एनपीएस ट्रस्ट बोर्ड में तीन नए ट्रस्टी नियुक्त किए गए हैं.
पेंशन फंड शुल्क में संशोधन
इसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष दिनेश कुमार खारा, यूटीआई एएमसी की पूर्व कार्यकारी उपाध्यक्ष और ट्रस्टी स्वाति अनिल कुलकर्णी, और डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के सह-संस्थापक व प्रमुख तथा एसआईडीबीआई द्वारा प्रबंधित फंड ऑफ फंड्स योजना के तहत राष्ट्रीय वेंचर कैपिटल निवेश समिति के सदस्य डॉ. अरविंद गुप्ता शामिल हैं. खारा को एनपीएस ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में भी नामित किया गया है.
बदलती परिस्थितियों, जनता की आकांक्षाओं, अंतर्राष्ट्रीय मानकों और कॉरपोरेट, रिटेल और गिग-इकोनॉमी क्षेत्रों में कवरेज बढ़ाने के उद्देश्य से, पीएफआरडीए ने 1 अप्रैल, 2026 से ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए पेंशन फंडों के निवेश प्रबंधन शुल्क (IMF) ढांचे में संशोधन किया है.
एनपीएस के लिए संशोधित IMF नीति
आईएमएफ द्वारा संशोधित स्लैब-आधारित नीति में सरकारी और निजी क्षेत्र के ग्राहकों के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं, जो मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) के तहत आने वाली योजनाओं पर भी लागू होंगी. हालांकि, एमएसएफ कोष की गणना अलग से की जाएगी. पीएफआरडीए का मानना है कि इन नीतिगत सुधारों से ग्राहकों और हितधारकों को अधिक प्रतिस्पर्धी, सुव्यवस्थित और मजबूत एनपीएस प्रणाली तक पहुंच मिलेगी, जिससे दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति लाभ बेहतर होंगे और वृद्धावस्था में आय सुरक्षा बढ़ेगी.
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