चीन-रूस की नो लिमिट सांझेदारी से अमेरिका परेशान, 40 से अधिक बार मिल चुके हैं जिनपिंग और पुतिन

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New Delhi: चीन और रूस अपना सहयोग बढ़ा रहे हैं और आक्रामक कदम उठा रहे हैं, जिनकी वजह से अमरीका को गंभीर परिणाम भुगतना पड रहा है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन ने बार-बार कहा है कि उनकी सांझेदारी की कोई सीमा नहीं है और वे 40 से अधिक बार आमने-सामने मिल चुके हैं. फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद से चीन ने रूस को उच्च प्राथमिकता वाली वस्तुओं का निर्यात बढ़ा दिया है.

अमरीका, जापान को होना पड़ा मजबूर

जिनमें 50 दोहरे उपयोग वाली वस्तुएं शामिल हैं. जैसे कम्प्यूटर चिप्स, मशीन टूल्स, राडार और सैंसर, जिनकी रूस को युद्ध जारी रखने के लिए आवश्यकता है. 9 दिसम्बर को चीनी और रूसी बमवर्षक विमानों और अन्य विमानों ने जापान और दक्षिण कोरिया के निकट उड़ान भरी, जिससे अमरीका और जापान को लड़ाकू विमानों और बमवर्षक विमानों को तैनात करने के लिए मजबूर होना पड़ा. यह घटना चीन-रूस गठजोड़ के और अधिक मजबूत होने का नवीनतम उदाहरण है.

अमरीका को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं बीजिंग और मॉस्को

बीजिंग और मॉस्को अमरीका को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं और अमरीका और उसके सहयोगियों की कीमत पर अपनी शक्ति का विह्यस्तार करना चाहते हैं. चीन के निर्यात ने रूस को 2023 से 2024 तक इस्कंदर-एम बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन 3 गुना बढ़ाने में मदद की, जिनका उपयोग रूस ने यूक्रेनी शहरों पर बमबारी करने के लिए किया है. 2024 में रूस द्वारा आयात किए गए अमोनियम परक्लोरेट का 70 प्रतिशत हिस्सा चीन का था जो बैलिस्टिक मिसाइल ईंधन का एक आवश्यक घटक है.

यूक्रेन में इस्तेमाल किए जाने वाले महत्वपूर्ण घटक

चीन ने रूस को ड्रोन बॉडी, लिथियम बैटरी और फाइबर-ऑप्टिक केबल प्रदान किए हैं जो यूक्रेन में इस्तेमाल किए जाने वाले फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन के लिए महत्वपूर्ण घटक हैं जो इलैक्ट्रॉनिक जैमिंग को बाईपास कर सकते हैं. इस सहयोग से चीन को लाभ हो रहा है. रूस ने उन्नत प्रणोदन प्रणाली उपलब्ध कराकर चीन की अगली पीढ़ी की टाइप 096 परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी के विकास में संभवत सहायता की है.

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