China-Taiwan Tension: ताइवान के आसपास चीन का बड़ा सैन्य अभ्यास, अमेरिका ने जताई चिंता

Divya Rai
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Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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China-Taiwan Tension: संयुक्त राज्य अमेरिका ने ताइवान के आसपास चीन के अब तक के सबसे बड़े सैन्य अभ्यासों पर चिंता जताई है. अमेरिका का कहना है कि बीजिंग की कार्रवाई और बयानबाजी से क्षेत्र में तनाव अनावश्यक रूप से बढ़ सकता है.

चीन को सैन्य दबाव से पीछे हटना चाहिए China-Taiwan Tension

इन अभ्यासों पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ उप प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि चीन को सैन्य दबाव से पीछे हटना चाहिए और बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए. उन्होंने 1 जनवरी को जारी बयान में कहा कि चीन की सैन्य गतिविधियां ताइवान और आसपास के देशों के लिए अनावश्यक तनाव पैदा कर रही हैं. अमेरिका ने बीजिंग से संयम बरतने, ताइवान पर सैन्य दबाव खत्म करने और सार्थक बातचीत शुरू करने की अपील की है.

जस्टिस मिशन 2025 नाम के बड़े सैन्य अभ्यास पूरे किए

यह बयान ऐसे समय आया है, जब चीन ने “जस्टिस मिशन 2025” नाम के बड़े सैन्य अभ्यास पूरे किए. ये अभ्यास 29 से 31 दिसंबर के बीच हुए, जिनमें जिसमें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की सेना, नौसेना, वायु सेना और रॉकेट बलों द्वारा समन्वित अभियान शामिल थे. इन अभ्यासों में ताइवान के चारों ओर घेराबंदी जैसे हालात का अभ्यास किया गया. इसमें प्रमुख बंदरगाहों को बंद करना, सटीक हमले करना और आपूर्ति मार्गों को बाधित करने जैसे दृश्य शामिल थे.

अमेरिका के कई सहयोगी देशों ने भी चिंता जताई

ताइवान प्रशासन के अनुसार, इस दौरान उसने 77 चीनी सैन्य विमानों और 17 नौसैनिक जहाजों की गतिविधियां दर्ज कीं. इसके जवाब में ताइवान ने लड़ाकू विमान उड़ाए और सुरक्षा कदम उठाए. तैयारी के तहत नदियों के मुहानों पर विस्फोटक बैरल जैसे अवरोध भी लगाए गए. इन अभ्यासों के पैमाने और समय को लेकर अमेरिका के कई सहयोगी देशों ने भी चिंता जताई. यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य दबाव पर असहजता जताते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियों से गलत आकलन का खतरा बढ़ जाता है.

अलगाववादी ताकतों के लिए चेतावनी बताया

चीन ने इन अभ्यासों को अलगाववादी ताकतों के लिए चेतावनी बताया है. बीजिंग ने इसे अमेरिका और ताइवान के बीच रक्षा सहयोग से भी जोड़ा, जिसमें हाल ही में ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बड़ी बिक्री शामिल है. चीन का कहना है कि ताइवान के आसपास उसकी सैन्य गतिविधियां बाहरी हस्तक्षेप के जवाब में हैं. अमेरिका ने दोहराया कि वह ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता का समर्थन करता है और किसी भी तरह से बल या दबाव के जरिए मौजूदा स्थिति बदलने का विरोध करता है. क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आपूर्ति व्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है.

बीजिंग के संप्रभुता के दावों को खारिज कर दिया

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने नए साल के अपने संदेश में ताइवान के साथ एकीकरण के लक्ष्य को दोहराया. वहीं ताइवान की सरकार ने बीजिंग के संप्रभुता के दावों को खारिज कर दिया है और कहा है कि द्वीप का भविष्य केवल वहां के लोग ही तय कर सकते हैं. ताइवान वर्ष 1949 से मुख्य भूमि चीन से अलग तरीके से शासित है और उसने अपनी लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था, सेना और अर्थव्यवस्था विकसित की है. चीन ताइवान को अपना अलग हुआ प्रांत मानता है और उसे मुख्य भूमि में शामिल करने का लक्ष्य लगातार दोहराता रहा है.

हाल की एक स्वतंत्र रिपोर्ट में कहा गया है कि ये चीन की समुद्री इलाकों में दबाव बनाने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका लंबे समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत और बिना दबाव के किया जाना चाहिए, ताकि समुद्री और हवाई आवाजाही की स्वतंत्रता बनी रहे.

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