सरकार ने शुक्रवार को इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 22 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी. इन प्रोजेक्ट्स में लगभग 41,863 करोड़ रुपये का निवेश होगा और इससे 37,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है. इन पहलों से देश की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता कम होगी. अनुमोदित प्रोजेक्ट्स का अनुमानित उत्पादन 2.58 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचने की उम्मीद है. मंजूरी पाने वाले कंपनियों में डिक्सन, सैमसंग डिस्प्ले नोएडा प्राइवेट लिमिटेड, फॉक्सकॉन की युझान टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज शामिल हैं.
यह नई मंजूरी उन 24 आवेदन के अतिरिक्त है, जिसमें 12,704 करोड़ रुपए का निवेश हुआ था. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, इस दौर की स्वीकृतियों में मोबाइल फोन, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और आईटी हार्डवेयर सहित 11 क्षेत्रों में विनिर्माण कार्य शामिल हैं. यह परियोजनाएं आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित आठ राज्यों में स्थापित की जाएंगी.
इंडस्ट्री लीडर्स ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि ईसीएमएस योजना की सफलता इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत के इरादे से क्रियान्वयन की ओर निर्णायक बदलाव का प्रतीक है. आईईएसए और एसईएमआई इंडिया के अध्यक्ष अशोक चंदक ने कहा, “2025 के अंत तक, भारत ने एक विश्वसनीय और निवेश योग्य ईएसडीएम गंतव्य के रूप में वैश्विक विश्वास अर्जित कर लिया है. ईसीएमएस एक क्रांतिकारी बदलाव है क्योंकि एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र को केवल सेमीकंडक्टर ही नहीं, बल्कि कंपोनेंट्स, मैटेरियल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू एडिशन की आवश्यकता होती है.”
अगले चरण में उत्पादन बढ़ाने, मजबूत डिजाइन टीमों का निर्माण करने, स्थानीय स्तर पर सोर्सिंग को बढ़ावा देने और निर्मित उत्पादों में विश्व स्तरीय गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर ध्यान देना होगा. अधिकारियों ने कहा कि ओईएम और सिस्टम कंपनियों को मेड-इन-इंडिया कंपोनेंट्स को सक्रिय रूप से अपनाना चाहिए, क्योंकि मांग सृजन उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि आपूर्ति सृजन. वितरक भारतीय कंपोनेंट्स को पूरे देश और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाएंगे.
मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए, सरकार ने 2025 में ईसीएमएस योजना शुरू की. यह योजना प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, विद्युत और यांत्रिक घटकों, कैमरा मॉड्यूल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है. मजबूत नीतिगत प्रयासों के चलते, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में तेजी से बढ़ा है—2014-15 में 1.9 लाख करोड़ रुपये से यह 2024-25 में 11.32 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया, यानी पिछले 11 वर्षों में लगभग छह गुना वृद्धि हुई.