Travel Tips: नए साल में लोग छुट्टियां मनाने पहाड़ों और ऊंची जगहों पर घूमने जा रहे हैं. लेकिन ऊंचाई पर यात्रा करते समय अक्सर पेट खराब हो जाता है. इसका मुख्य कारण हाइपोक्सिया यानी ऑक्सीजन की कमी है.
ऊंचाई पर वेगस नर्व सही काम नहीं करती
ऊंचाई पर वेगस नर्व सही काम नहीं करती, पाचन धीमा पड़ जाता है, गैस बनती है और पेट फूलता है. ठंड भी पाचन को और धीमा कर देती है. ट्रैवल से माइक्रोबायोम पर भी असर पड़ता है. ऐसे में सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा ने ऊंचाई पर ट्रैवल करने वालों के लिए महत्वपूर्ण सलाह दी. न्यूट्रिशनिस्ट बताती हैं कि हाई एल्टीट्यूड पर सिर्फ पेट फूलना ही नहीं होता, बल्कि पूरा पेट बेतरतीब हो जाता है. इसका मुख्य कारण है हाइपोक्सिया, यानी ऑक्सीजन की कमी, जो शरीर के नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती है. इससे पाचन भी प्रभावित होता है.
आंतों की गतिशीलता पड़ जाती है धीमी Travel Tips
उन्होंने एक स्टडी का हवाला देते हुए बताया कि हाइपोक्सिया जीआई मोटिलिटी, यानी आंतों की गति को धीमा करता है पाचन में बदलाव करता है. ऊंचाई बढ़ने पर हाइपोक्सिया के कारण वेगस नर्व ठीक से काम नहीं करती. वेगस नर्व पाचन को कंट्रोल करती है, लेकिन ऑक्सीजन की कमी से यह खराब हो जाती है. नतीजतन, आंतों की गतिशीलता (मोटिलिटी) धीमी पड़ जाती है, एंजाइम्स सही से रिलीज नहीं होते और पेट देर से खाली होता है. इससे गैस, ब्लोटिंग और असहजता बढ़ जाती है. इसके अलावा, ऊंचाई पर ठंड का मौसम सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय कर देता है, जो ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड है. यह मोड शरीर को एनर्जी बचाने के लिए मजबूर करता है, जिससे पाचन और धीमा हो जाता है.
सोच-समझकर तैयारी करें
एक्सपर्ट के अनुसार यह सिर्फ एयर प्रेशर की समस्या नहीं है, बल्कि पूरा नर्वस सिस्टम एनर्जी कंजर्वेशन मोड में चला जाता है. ट्रैवल का असर भी पेट के माइक्रोबायोम पर पड़ता है, जो गट बैक्टीरिया का संतुलन है. ऊंचाई पर यह असर और बढ़ जाता है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं गंभीर हो सकती हैं. न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह है कि जिस तरह सूटकेस पैक करने से पहले सोच-समझकर तैयारी करते हैं, उसी तरह पेट को भी तैयार करें. सफर पर निकलने से पहले हल्का भोजन लें, हाइड्रेशन का ध्यान रखें और ऐसे भोजन या नाश्ते का चुनाव करें, जो पाचन को सपोर्ट करें.
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