ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप को सता रहा डर, चीन-रूस को लेकर बोले- पड़ोसी नहीं बनने…

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Greenland Controversy : वेनेजुएला पर हमला करने के बाद अब ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड पर टिकी हुई है. ऐसे में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्‍होंने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करेगा, ‘चाहे वे चाहें या न चाहें’ क्योंकि उनका मानना है कि अगर अमेरिका ने ऐसा नहीं किया तो रूस या चीन वहां अपना प्रभाव बढ़ा सकते हैं. इसके साथ ही उन्‍होंने ये भी कहा कि ‘हम रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देंगे.’

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार ट्रंप के आक्रामक रुख की चर्चा सिर्फ ग्रीनलैंड तक सीमित नहीं है. इसके पहले ट्रंप वेनेजुएला को लेकर दिए गए बयानों के साथ मैक्सिको में जमीनी सैन्य कार्रवाई की धमकी भी दे चुके हैं. इस मामलेको लेकर उनके विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्पष्ट रूप करते हुए कहा कि वे क्यूबा को लेकर भी सख्त नीति अपनाने के पक्ष में हैं.

आर्थिक प्रलोभन देने के विकल्प पर विचार

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बताया गया कि व्हाइट हाउस के अधिकारी ग्रीनलैंड के निवासियों को डेनमार्क से अलग होकर अमेरिका के करीब लाने के लिए आर्थिक प्रलोभन देने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं. इसके तहत ग्रीनलैंड के हर नागरिक को 10,000 डॉलर से लेकर 1,00,000 डॉलर तक की एकमुश्त राशि देने पर आंतरिक चर्चा चल रही है. बता दें कि यह योजना अभी शुरुआती चरण में है और भुगतान के समय व प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट फैसला नहीं हुआ है.

ग्रीनलैंड को खरीदने का नया विचार नहीं

जानकारी के मुताबिक, ग्रीनलैंड को खरीदने का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नया विचार नही है. फिलहाल आज के समय में इस पर अधिक गंभीरता से विचार किया जा रहा है. ऐसे में विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अमेरिकी सांसदों को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ग्रीनलैंड पर जबरन कब्जा नहीं करना चाहते, बल्कि उसे खरीदने के विकल्प को प्राथमिकता दे रहे हैं.

ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बीच स्थित ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, इसका क्षेत्रफल लगभग 21,66,086 वर्ग किलोमीटर (8,36,330 वर्ग मील) है. बता दें कि वर्तमान में यह द्वीप डेनमार्क का अर्ध स्वायत्त क्षेत्र है. इसके साथ ही यहां की आबादी करीब 57,000 है और यह इलाका प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर माना जाता है.

वाशिंगटन के बयानों की तीखी आलोचना

माना जाता है कि डेनमार्क और अमेरिका दोनों नाटो के सहयोगी देश हैं, ऐसे में इसके बाद भी ग्रीनलैंड को लेकर वाशिंगटन के हाल के बयानों की तीखी आलोचना हुई है. इसी के साथ फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क ने एक संयुक्त बयान जारी किया. इसे लेकर स्‍पष्‍ट रूप से कहा गया कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला पूरी तरह ग्रीनलैंड और डेनमार्क का अधिकार है और इसमें अमेरिकी हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा.

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