FPI बिकवाली और अमेरिकी टैरिफ से हिला शेयर बाजार, निफ्टी–सेंसेक्स 2.5 प्रतिशत टूटे

Shivam
Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Must Read
Shivam
Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में 2.5% से अधिक की गिरावट देखने को मिली. मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं ने बाजार पर दबाव बनाए रखा. पूरे सप्ताह के दौरान सभी सेक्टोरल इंडेक्स नुकसान में बंद हुए.

सबसे ज्यादा गिरावट रियल्टी सेक्टर में दर्ज की गई, जो 11.33% टूट गया. वहीं कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, टेलीकॉम और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी सेक्टरों में भी 5% से अधिक की कमजोरी देखने को मिली.

निफ्टी–सेंसेक्स का हाल

हफ्ते के दौरान निफ्टी में 2.51% की गिरावट आई और आखिरी कारोबारी दिन यह 0.95% फिसलकर 25,048 पर बंद हुआ. वहीं सेंसेक्स आखिरी दिन 769 अंक यानी 0.94% गिरकर 81,537 पर बंद हुआ. पूरे हफ्ते में सेंसेक्स 2.43% नीचे रहा.

स्मॉल और मिडकैप शेयरों पर दबाव ज्यादा देखने को मिला, जिसमें निफ्टी मिडकैप 100 में 4.58%, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 5.81% की गिरावट दर्ज की गई.

बैंक निफ्टी और सेक्टोरल दबाव

बैंक निफ्टी भी दबाव में रहा और एक अहम सपोर्ट लेवल 58,800 के नीचे फिसल गया, जिससे बाजार में नकारात्मक संकेत और मजबूत हो गए. विशेषज्ञों का कहना है कि हफ्ते की शुरुआत में कुछ आईटी और बैंकिंग कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों से बाजार को सीमित राहत मिली थी, लेकिन बाद में कई कंपनियों के कमजोर नतीजों ने निवेशकों का भरोसा फिर से कमजोर कर दिया.

इसी बीच वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड और टैरिफ को लेकर दिए गए सख्त बयानों, ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ा दी. इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया और बिकवाली का दबाव बढ़ गया.

वैश्विक संकेत और रुपये पर दबाव

इसके अलावा, वैश्विक बॉन्ड यील्ड बढ़ने और अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ मामलों की समीक्षा को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति को और भी सीमित कर दिया.

1 जनवरी 2026 से अब तक, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 4% से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है. इस दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने करीब 36,500 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं.

इस दौरान भारतीय रुपया भी दबाव में रहा और कमजोर होकर लगभग 92 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के करीब पहुंच गया. इससे आयात लागत बढ़ने और महंगाई पर असर पड़ने की आशंका तेज हो गई है.

आगे बाजार की नजर किस पर

अब निवेशकों की नजर केंद्रीय बजट 2026 और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर टिकी हुई है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बजट से पहले कुछ समय के लिए बाजार में सीमित तेजी देखने को मिल सकती है, क्योंकि कई विदेशी निवेशकों की शॉर्ट पोजिशन पहले से बनी हुई है.

हालांकि, बाजार में टिकाऊ सुधार तभी संभव होगा जब वैश्विक हालात सुधरेंगे, कंपनियों के नतीजे मजबूत रहेंगे और बजट से निवेशकों को भरोसा मिलेगा.

Latest News

मन पर विजय ही जीवन की सच्ची जीत: पंकज जी महाराज

दुल्लहपुर (गाजीपुर) में जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था की 83 दिवसीय जनजागरण यात्रा का भव्य स्वागत हुआ. संत पंकज जी महाराज ने सत्संग में आत्मकल्याण और सदाचारी जीवन का संदेश दिया.

More Articles Like This