GDP CPI IIP New Base Year: सरकार ने प्रमुख आर्थिक आंकड़ों की प्रासंगिकता, सटीकता और वैश्विक स्तर पर तुलना को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एक विस्तृत समीक्षा प्रक्रिया पूरी कर ली है. इसके तहत अब नए बेस ईयर पर आधारित जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी की नई सीरीज जारी की जाएगी. तय कार्यक्रम के अनुसार जीडीपी के नए आंकड़े 27 फरवरी को, सीपीआई के आंकड़े 12 फरवरी को और आईआईपी के आंकड़े 28 मई को जारी किए जाएंगे. यह जानकारी सोमवार को संसद में दी गई.
संसद में सरकार की ओर से दी गई जानकारी
राज्यसभा में राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने इन तीनों आर्थिक सूचकांकों के बेस ईयर को बदलने के लिए एक विस्तृत और गहन प्रक्रिया पूरी की है, जिसका उद्देश्य इन आंकड़ों को ज्यादा प्रासंगिक, सटीक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है. मंत्री ने बताया कि जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी के बेस ईयर में बदलाव का काम तकनीकी सलाहकार समितियों की देखरेख में किया गया है.
विशेषज्ञों की निगरानी में पूरी हुई प्रक्रिया
इन समितियों में विश्वविद्यालयों से जुड़े विशेषज्ञों, केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारियों, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सहित विभिन्न संस्थानों के जानकारों को शामिल किया गया है. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान गणना पद्धतियों में सुधार, नए डेटा स्रोतों को शामिल करना और भारांक को अपडेट करना प्रमुख बिंदु रहे. सरकार ने स्पष्ट किया कि सीपीआई और जीडीपी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के विशेष डेटा प्रसार मानक यानी एसडीडीएस के अनुरूप हैं, जिनमें आंकड़ों की उपलब्धता, समय पर प्रकाशन, सार्वजनिक पहुंच, विश्वसनीयता और गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल होते हैं.
आर्थिक आंकड़े होंगे ज्यादा सटीक और भरोसेमंद
सरकार के अनुसार, हाल के सांख्यिकीय सुधारों से देश के आर्थिक आंकड़े पहले से ज्यादा भरोसेमंद, समय के अनुरूप और उपयोगी बने हैं. जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी के बेस ईयर को अपडेट करने से देश की मौजूदा अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर सामने आएगी, खासकर सेवा क्षेत्र और अनौपचारिक क्षेत्र की बेहतर गणना हो सकेगी. इसके साथ ही सरकार ने डेटा की गुणवत्ता, समय पर उपलब्धता और आम लोगों की पहुंच को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं.
पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर सरकार का जोर
नई सीरीज को एक साथ लागू करना इस बात को दर्शाता है कि सरकार पारदर्शिता, अंतरराष्ट्रीय मानकों और सभी हितधारकों के सहयोग को महत्व देती है. सरकार ने बताया कि जीडीपी का नया बेस ईयर 2022-23 रखा गया है, ताकि अर्थव्यवस्था में आए नए बदलावों को सही तरीके से दिखाया जा सके. वहीं सीपीआई का बेस ईयर 2024 तय किया गया है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के उपभोक्ताओं की खपत को अधिक सटीक रूप से आंका जा सके.
IIP के बेस ईयर में भी बदलाव
अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी का बेस ईयर भी 2022-23 किया जा रहा है, ताकि यह नए राष्ट्रीय खातों के ढांचे के अनुरूप हो सके. आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इन सभी सुधारों से नीतियां तैयार करने, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और आम नागरिकों तक सही जानकारी पहुंचाने में मदद मिलेगी. इससे यह सुनिश्चित होगा कि तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के दौर में भारत के सरकारी आंकड़े हमेशा प्रासंगिक और भरोसेमंद बने रहें.

