‘अब होगा बांग्लादेश के इतिहास का सबसे खराब चुनाव’, पूर्व राजदूत मोहम्मद राशिद ने दी चेतावनी

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Bangladesh Elections: बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होना है, जिसपर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई है. इससे ठीक पहले एक अनुभवी राजदूत (अब निर्वासित) मोहम्मद हारून अल राशिद ने चुनावों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए हैं. उन्‍होंने दावा किया है कि बांग्‍लादेश के अब तक के इतिहास का ये ‘सबसे बदसूरत’ चुनाव होगा.

मोहम्मद राशिद ने चुनावों को लेकर चेतावनी दी है कि अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस, जो लंबे समय से घटिया चीजों को अच्छाई के तौर पर रीपैकेज करके खुद को बचाए हुए हैं, जवाबदेही से बच नहीं सकते.

चुनाव देश के इतिहास का सबसे बदसूरत चेहरा

राशिद ने कहा कि “यूनुस हर चीज को ‘खूबसूरत’ कहते हैं, लेकिन मैं मानता हूं यह चुनाव बांग्लादेश के इतिहास का सबसे बदसूरत चेहरा दिखाएगा. ऐसा मैं कोई बढ़ा-चढ़ाकर बोलने के लिए नहीं कर रहा. यूनुस लंबे समय से घटिया चीजों को अच्छाई के तौर पर रीपैकेज कर खुद को बचा रहे हैं. इस बार, वह बच नहीं पाएंगे.”

उन्होंने कहा कि जो हो रहा है वह असली चुनाव नहीं है, बल्कि 2024 के “जिहादी गठबंधन” के दो गुटों के बीच मुकाबला है, जिसने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाकर सत्ता पर कब्जा जमाया है. उन्होंने तर्क दिया कि एक तरफ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और उसके सहयोगी हैं, जबकि दूसरी तरफ कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी और उसके साथी हैं.

बीएनपी मिस्र के मुस्लिम ब्रदरहुड जैसी

राशिद ने कहा कि विचारधारा के हिसाब से बीएनपी मिस्र के मुस्लिम ब्रदरहुड जैसी है-भले ही स्ट्रक्चर के हिसाब से नहीं-जबकि जमात फिलिस्तीन में हमास जैसी है. उन्होंने कहा कि दोनों में से कोई भी लोकतांत्रिक मूल्यों को सामने नहीं रखता और दोनों ही इस्लामिक कट्टरपंथ का प्रतिनिधित्व करते हैं.

असली लोकतांत्रिक पार्टी को नहीं दी गई चुनाव लड़ने की इजाजत

राशिद ने कहा कि “किसी भी असली लोकतांत्रिक पार्टी को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी गई है. यूनुस खुलेआम नतीजे को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वह अगली सरकार के केंद्र में बने रहें. उनके पसंदीदा साथी जमात और उससे जुड़े लोग हैं, जिसमें एनसीपी भी शामिल है. इसके कैडर ने 2024 की जिहादी हिंसा के दौरान तथाकथित कोटा मूवमेंट के नाम पर सुसाइड ऑपरेटिव के तौर पर काम किया था.”

इंसानियत के लिए बड़ा झटका

उन्होंने जोर देकर कहा, “आप चाहें तो इसे इलेक्शन कह सकते हैं. यह ऐसा कुछ नहीं है.” राशिद से जब पूछा गया कि एक ऐसा देश जो पहले धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र के तौर पर पहचाना जाता था, अब उसे आतंक के चश्मे से देखा जाने लगा है. ऐसे में वे बांग्लादेश की बदलती छवि को कैसे देखते हैं? इस पर उन्‍होने कहा कि यह बदलाव न सिर्फ बांग्लादेश के लिए बल्कि 21वीं सदी में पूरी इंसानियत के लिए एक झटका है.

हसीना के राज में बर्बाइ हो गई इकॉनमी

उन्होंने आगे कहा कि “यूनुस के हड़पे हुए अठारह महीनों के राज से हुई तबाही ने दशकों की तरक्की को खत्म कर दिया है. इसने शेख हसीना के राज में बड़ी मेहनत से बनाई गई इकॉनमी को बर्बाद कर दिया है और बांग्लादेश की सेक्युलर पहचान, ऐतिहासिक यादों और उसके मुक्ति संग्राम की नैतिक विरासत को एक प्रक्रिया के तहत खत्म कर दिया है. यह सिर्फ राजनीतिक गिरावट नहीं है; यह पूरी सभ्यता के खिलाफ बर्बरता है.”

आतंक के राज में डूब गया बांग्‍लादेश

जब उनसे उनके इस दावे के बारे में पूछा गया कि यूनुस के राज में बांग्लादेश “आतंक में डूब गया है,” जबकि पश्चिम में यूनुस की लंबे समय से उदारवादी नेता की छवि रही है, तो राशिद ने कहा कि जिन लोगों ने यूनुस को करीब से देखा था, वे उन्हें “एक ठग और इंटरनेशनल ढोंगी मानते थे. ऐसा शख्स जो अपनी बातों और स्थापित इकबाल के बूते पश्चिम को अंधा करके अपनी ओर खींचने में माहिर था.”

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