AI से 150GB सरकारी डेटा की चोरी! मैक्सिको में हैकरो ने एंथ्रोपिक के चैटबॉक्स को बनाया हथियार

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Cyber Hacking: हर गुजरते वक्त के साथ यह सवाल और भी गहरा होता जा रहा है कि क्‍या इंसानों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को बनाकर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल करने के साथ-साथ सबसे बड़ी गलती भी कर दी है? क्‍योंकि एक ओर जहां AI चैटबॉट की मदद से लोग घर बैठे-बैठे कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी की डाइग्नोसिस खुद कर ले रहे हैं तो दूसरी तरफ यही AI सिस्टम इतने एडवांस लेबल तक पहुंच गए हैं कि अगर उनका दुरुपयोग किया जाए तो जैविक हथियार (बायोलॉजिकल वेपन) भी बनाए जा सकते हैं. कुछ ऐसी ही डरावनी खबर मैक्सिकों से सामने आई है. यहां हैकर्स ने AI चैटबॉट की मदद से सरकारी एजेंसियों के डेटा की ही चोरी कर ली है.

क्‍या है मैक्सिको में डाटा लीक का मामला?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, हैकरों ने मैक्सिको की सरकारी एजेंसियों को निशाना बनाकर कई साइबर हमले किए और ऐसा करने के लिए एंथ्रोपिक के एआई चैटबाट का इस्‍तेमाल किया गया, जिसका नाम क्लाउड है. रिपोर्ट के अनुसार, साइबर सुरक्षा पर रिसर्च करने वालों का दावा है कि इस AI हैकिंग की मदद से मैक्सिको की सरकारी एजेंसियों के 150GB संवेदनशील डेटा चोरी कर लिए गए.

हमलावरों ने इस टॉप की AI कंपनी के क्लाउड AI टूल को स्पेनिश में प्रॉप्ट दिए और कहा कि वो सरकारी सिस्टम की कमजोरियों की पहचान करे और डेटा निकाल ले. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली साइबर सिक्योरिटी फर्म गैम्बिट सिक्योरिटी के रिसर्चर्स ने कहा कि हैकिंग का काम दिसंबर 2025 में शुरू हुआ और लगभग एक महीने तक जारी रहा.

रिपोर्ट के मुताबिक, जो डेटा चुराए गए हैं, उनमें लगभग 19.5 करोड़ टैक्सपेयर्स के रिकॉर्ड, वोटिंग डेटाबेस, सरकारी कर्मचारियों के क्रेडिट और नागरिक रजिस्ट्री दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी शामिल है.

हैकरों के लिए टूल बना AI

बता दें कि इस समय डिजिटल क्राइम करने के लिए AI एक प्रमुख टूल बन गया है. रिपोर्ट के अनुसार, अमेजॉन के रिसर्चर्स का कहना है कि हैकरों के एक छोटे समूह ने सबके लिए उपलब्ध AI टूल की मदद से ही दर्जनों देशों में 600 से अधिक फायरवॉल में सेंध लगा ली. दरअसल, फायरवॉल एक कंप्यूटर नेटवर्क सुरक्षा प्रणाली है जो एक सुरक्षित निजी नेटवर्क और असुरक्षित बाहरी नेटवर्क (जैसे इंटरनेट) के बीच एक डिजिटल बाधा या “दीवार” की तरह काम करती है. हैकर AI की मदद से इसी दीवार में सेंध लगा दे रहे हैं.

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