पुष्कर (राजस्थान): परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने अपने प्रवचन में भक्तों को भगवान के प्रति सच्ची भावना और समर्पण का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि जब भी मंदिर में भगवान के दर्शन करने जाएं तो केवल औपचारिक रूप से नहीं, बल्कि गहरी भावना के साथ दर्शन करें.
मोरारी बापू ने कहा कि भक्त को यह भाव रखना चाहिए कि जैसे वह भगवान को देख रहा है, वैसे ही भगवान भी उसे देख रहे हैं. यदि इस भावना के साथ मंदिर में दर्शन किए जाएं तो मन को अनोखी शांति और आनंद की अनुभूति होती है.
हर प्राणी में भगवान का वास
अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि मंदिर में जिस भावना से भगवान के दर्शन किए जाते हैं, उसी भावना से प्रत्येक प्राणी में भी ईश्वर के दर्शन करने का भाव विकसित होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि ईश्वर केवल मंदिर की मूर्ति तक सीमित नहीं हैं. वह प्रत्येक जीव के भीतर प्रकाशमान चेतना के रूप में उपस्थित हैं. यदि परमात्मा हमारे भीतर न हों, तो मनुष्य में चेतना का अस्तित्व ही संभव नहीं हो सकता.
परमात्मा ही देता है शक्ति
मोरारी बापू ने बताया कि मनुष्य के मन, बुद्धि और इंद्रियों को शक्ति देने वाला भी वही परमात्मा है. इसलिए जीवन में हर समय ईश्वर का स्मरण करना चाहिए और उसी के प्रति श्रद्धा और नम्रता बनाए रखनी चाहिए.
प्रकृति का दास बनने से बढ़ता है दुःख
उन्होंने कहा कि जब मनुष्य केवल प्रकृति और भौतिक इच्छाओं का दास बन जाता है, तब उसे जीवन में दुःख और अशांति का अनुभव होता है. लेकिन जिस दिन मनुष्य परमात्मा का दासत्व स्वीकार कर लेता है, उसी दिन वह सुख-दुःख से ऊपर उठ जाता है.
प्रवचन के अंत में मोरारी बापू ने पुष्कर आश्रम और गोवर्धनधाम आश्रम की ओर से सभी हरि भक्तों के सुख, शांति और मंगल की कामना की.

