हरीश राणा को इच्छामृत्यु पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट में जजों ने पढ़ा था संस्कृत श्लोक, समाज सुधारक तक का किया उल्लेख

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New Delhi: सुप्रीम कोर्ट में गाजियाबाद के हरीश राणा को इच्छामृत्यु की अनुमति देने का फैसला सुनाते हुए जज ने संस्कृत श्लोक पढ़ा था. इस दौरान जज भावुक भी नजर आए. निर्णय लिखते हुए उन्होंने इंग्लैंड के साहित्य से लेकर भारत के प्राचीन ग्रंथों तक का उल्लेख किया. अदालत ने अपने फैसले की शुरुआत 19वीं सदी के अमेरिकी समाज सुधारक Henry Ward Beecher के विचार से की.

साहित्यकार के प्रसिद्ध विचार का भी उल्लेख

कोर्ट ने लिखा कि जीवन हमें चुनने का विकल्प नहीं देता, लेकिन हम उसे किस तरह स्वीकार करते हैं, यह हमारा चुनाव होता है. इसके साथ ही न्यायाधीशों ने 16वीं सदी के प्रसिद्ध साहित्यकार William Shakespeare के प्रसिद्ध विचार “To be or not to be” का भी उल्लेख किया. कहा कि यह जीवन और मृत्यु के बीच मनुष्य की गहरी दुविधा को दर्शाता है.

केवल मृत शरीर को जलाती है चिता

फैसले में अदालत ने एक प्राचीन ग्रंथ का संस्कृत श्लोक भी उद्धृत किया- “चिंता चिता द्वयोर्मध्ये, चिंता तत्र गरीयसी. चिता दहति निर्जीवं, चिंता दहति सजीवकम्.” अर्थात: चिता और चिंता में चिंता अधिक भयानक है, क्योंकि चिता केवल मृत शरीर को जलाती है, जबकि चिंता जीवित व्यक्ति को भी जला देती है. कोर्ट ने कहा कि इस आदेश से परिवार का दुख पूरी तरह समाप्त नहीं होगा, लेकिन लंबे समय से चली आ रही पीड़ा और मानसिक तनाव कुछ हद तक कम हो सकेगा.

परिवार की पीड़ा का भी उल्लेख

अदालत ने अपने फैसले में Harish Rana के माता-पिता और परिवार की पीड़ा का भी उल्लेख किया. कोर्ट ने कहा कि पिछले 12–13 वर्षों में परिवार ने पूरी निष्ठा से उनकी देखभाल की और इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी. जब स्थिति में सुधार की कोई उम्मीद नहीं बची, तब उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाया.

अदालत के आदेश के बाद अस्पताल में शिफ्ट

32 वर्षीय हरीश राणा मूल रूप से गाजियाबाद के रहने वाले हैं और 2013 में पंजाब में बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे. 20 अगस्त 2013 को जिस पेइंग गेस्ट बिल्डिंग में वे रहते थे, वहां की चौथी मंजिल से गिरने के कारण उन्हें गंभीर चोटें आईं और तभी से वह कोमा में हैं. अब अदालत के आदेश के बाद उन्हें अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा, जहां इच्छामृत्यु की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इसके लिए All India Institute of Medical Sciences ने एक मेडिकल कमेटी भी गठित की है.

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