US Israel Iran War: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगी अमेरिका के उस फैसले से नाराज हैं, जिसमें ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है. अगर ट्रंप ऐसा न करें तो तेल के दाम और भी ज्यादा हो जाएंगा, जिसका परिणाम अमेरिका समेत पूरी दुनिया पर होगा. ट्रंप दबाव में आ जाएंगे और युद्ध खत्म करने को मजबूर हो जाएंगे.
30 दिन की छूट देकर देशों को राहत
अमेरिका ने 30 दिन की छूट देकर उन देशों को राहत दी है जो समुद्र में फंसे रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदना चाहते हैं. ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के बीच यह कदम वैश्विक तेल कीमतों को काबू में रखने के लिए उठाया गया है. लेकिन यूक्रेन का कहना है कि यही पैसा आखिरकार रूस की युद्ध मशीन को ताकत देगा.
यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में करेगा इस्तेमाल
यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने साफ कहा कि अमेरिका की इस ढील से रूस की स्थिति मजबूत होगी और उसे अरबों डॉलर की अतिरिक्त कमाई मिल सकती है, जिसका इस्तेमाल वह यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में करेगा. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी इस फैसले पर चिंता जताई है.
ईरान युद्ध के बहाने रूस को आर्थिक राहत
यूरोप का डर यह है कि ईरान युद्ध के बहाने रूस को आर्थिक राहत मिल रही है, जिससे यूक्रेन पर दबाव और बढ़ सकता है. दरअसल, अमेरिका ने कभी रूस के तेल को यूक्रेन युद्ध की फंडिंग बताकर उसे खरीदने पर रोक लगा दी थी. लेकिन अब उसी अमेरिका ने बढ़ती तेल कीमतों और होर्मुज संकट के कारण रूसी तेल खरीद पर आंशिक छूट दी है.
नौसेना भेजकर होर्मुज को खुला रखने में मदद
वहीं जिस चीन को वह अपना सबसे बड़ा रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानता है, अब उसी से उम्मीद जता रहा है कि वह अपनी नौसेना भेजकर होर्मुज को खुला रखने में मदद करे. यह दिखाता है कि इजरायल-ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के बयानों से अलग अमेरिका एकदम बेबस है.
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