Iran War Impact: ईरान युद्ध का डीजल और जेट फ्यूल पर पड़ेगा ज्यादा असर, तेल संकट से वैश्विक बाजार में हलचल

Shivam
Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Must Read
Shivam
Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Iran War Oil Impact: ईरान युद्ध के चलते वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता देखने को मिल रही है. गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट का असर सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डीजल और जेट फ्यूल जैसे रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों पर ज्यादा पड़ सकता है.

डीजल और जेट फ्यूल की कीमतों में तेज उछाल

रिपोर्ट में बताया गया है कि डीजल और जेट फ्यूल जैसे उत्पादों की कीमतों में कच्चे तेल की तुलना में ज्यादा तेजी आई है. मीडियम और हेवी क्रूड की सप्लाई बाधित होने से इन ईंधनों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

युद्ध से सप्लाई चेन पर बड़ा असर

अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ गया है. 28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब तीसरे हफ्ते में पहुंच चुका है और पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है.

होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्यात प्रभावित

संघर्ष के चलते होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात बाधित हो गया है. इसके अलावा कई ऊर्जा ढांचे पर हमले हुए हैं, जिससे उत्पादन में कटौती और रिफाइनरी संचालन पर असर पड़ा है.

कच्चे तेल में 40% से ज्यादा उछाल

रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती हमलों के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में 40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है.

एशिया में ईंधन कीमतें दोगुनी

डीजल और जेट फ्यूल की कीमतों में इससे भी ज्यादा तेजी देखी गई है. एशिया के कुछ देशों में कीमतें दोगुनी तक पहुंच गई हैं. चीन, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने घरेलू बाजार को सुरक्षित रखने के लिए निर्यात सीमित कर दिया है.

रिफाइनरी संचालन पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार, पर्शियन गल्फ क्षेत्र में रिफाइंड उत्पादों का निर्यात प्रभावित हुआ है. कई रिफाइनरी बंद हो रही हैं और डीजल जैसे ईंधन के उत्पादन में कमी आ रही है.

मीडियम और हेवी क्रूड की कमी

रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्शियन गल्फ से आने वाला करीब 60% कच्चा तेल मीडियम और हेवी श्रेणी का होता है, जिसका इस्तेमाल डीजल और जेट फ्यूल बनाने में किया जाता है. इसके विकल्प सीमित होने से संकट और गहरा सकता है.

नेफ्था और उद्योगों पर असर

इस संकट का असर नेफ्था पर भी पड़ेगा, जो पेट्रोकेमिकल उद्योग के लिए जरूरी कच्चा माल है. एशिया अपनी जरूरत का करीब 50 प्रतिशत नेफ्था इसी क्षेत्र से लेता है.

यूरोप भी प्रभावित

यूरोप अपने करीब 40 प्रतिशत जेट फ्यूल के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर है. ऐसे में यह संकट वैश्विक स्तर पर ईंधन सप्लाई और कीमतों पर बड़ा असर डाल सकता है.

यह भी पढ़े: Crude Oil Price Surge: होर्मुज संकट का असर, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, ब्रेंट 3% चढ़ा

Latest News

Nita Ambani का ‘मानवता’ को सलाम: ओडिशा में मिला 2025 का प्रतिष्ठित ‘ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड’!

नीता अंबानी को KISS भुवनेश्वर ने ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया. समाजसेवा में उनके योगदान को सराहा गया.

More Articles Like This