Stock Market Bloodbath: हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में ऐसी भारी बिकवाली देखने को मिली जिसने निवेशकों की चिंता कई गुना बढ़ा दी. सोमवार को बाजार खुलने के साथ ही बिकवाली का दबाव बढ़ने लगा और समय बीतने के साथ गिरावट और गहरी होती चली गई. घरेलू बाजार पर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर साफ दिखाई दिया. मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों के भरोसे को कमजोर कर दिया. इसका असर यह हुआ कि बाजार में अचानक बड़ा भूचाल आ गया और कुछ ही घंटों में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बड़ी गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए.
निवेशकों के डूबे करीब 7 लाख करोड़ रुपये
आज बाजार में आई तेज गिरावट ने निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका दिया. बिकवाली के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण से करीब 7 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए. इसके बाद कुल बाजार पूंजीकरण घटकर लगभग 454 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया. बाजार की यह गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मझोले और छोटे शेयरों पर भी इसका असर दिखाई दिया. निवेशकों ने जोखिम को देखते हुए कई सेक्टरों में जमकर बिकवाली की, जिससे बाजार पर दबाव लगातार बढ़ता चला गया.
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी टूट
कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 1000 अंकों से ज्यादा टूटकर 74,300 के नीचे पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 भी 300 से ज्यादा अंक गिरकर 23,350 के नीचे फिसल गया. बाजार की कमजोरी का असर अन्य सूचकांकों पर भी दिखाई दिया. निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों में एक प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा बाजार में उतार-चढ़ाव को मापने वाला सूचकांक इंडिया वीआईएक्स भी 5 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर लगभग 19.78 के स्तर पर पहुंच गया, जो निवेशकों और ट्रेडर्स के बीच बढ़ती घबराहट का संकेत माना जा रहा है.
क्यों शेयर बाजार में मचा कोहराम?
शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह खाड़ी देशों में बढ़ता तनाव माना जा रहा है. संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी स्थित परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर रविवार को ड्रोन हमला होने की खबर के बाद वैश्विक बाजारों में चिंता का माहौल बन गया. हालांकि यूएई ने अभी तक इस हमले के लिए किसी को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया है, लेकिन इसे गंभीर उकसावे वाली घटना बताया गया है. इस घटना के बाद निवेशकों के बीच यह डर और बढ़ गया कि अगर हालात और बिगड़े तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है.
ट्रंप की चेतावनी ने और बढ़ाई चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को दी गई नई चेतावनी ने वैश्विक स्तर पर चिंता और बढ़ा दी है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “ईरान के लिए घड़ी टिक-टिक कर रही है. बेहतर होगा कि वे समझौते के लिए तेजी से कदम आगे बढ़ाएं, वरना उनका नामोनिशान नहीं बचेगा. समय बेहद कम है.” इस बयान के बाद बाजार में यह डर और गहरा गया कि अगर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता है तो हालात और गंभीर हो सकते हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में फिर लगी आग
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर सीधे कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया. ब्रेंट कच्चा तेल लगभग 2 प्रतिशत की तेजी के साथ 111 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल भी 2 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया. तेल की कीमतों में तेजी से आयातित महंगाई की चिंता फिर बढ़ गई है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से खरीदता है. ऐसे में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब दोनों पर असर डाल सकती हैं.
विदेशी निवेशकों की बढ़ी बेचैनी और बॉन्ड यील्ड में उछाल
बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया है. लगातार हो रही निकासी ने बाजार पर दबाव और बढ़ा दिया. इसके अलावा बॉन्ड यील्ड में भी तेज उछाल देखने को मिला. 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.632 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो फरवरी 2025 के बाद सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है. वहीं 30 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5.156 प्रतिशत और 2 साल के बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.101 प्रतिशत तक पहुंच गई. विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती बॉन्ड यील्ड महंगाई और आर्थिक दबावों का संकेत देती है, इसलिए आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम और बाजार की चाल पर बनी रहेगी.
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