Share Market Today: हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद कमजोर रही और जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, बाजार में गिरावट का दायरा भी बढ़ता चला गया. सोमवार को निवेशकों के बीच भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसका असर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर साफ दिखाई दिया. घरेलू बाजार पर अंतरराष्ट्रीय हालात, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव का दबाव देखने को मिल रहा है. बाजार में आई इस बड़ी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.
सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट
सोमवार को कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 945 अंक टूटकर 74,292 के स्तर तक पहुंच गया. वहीं निफ्टी भी 298 अंक की गिरावट के साथ 23,345 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया. बाजार खुलने के बाद लगातार बिकवाली बढ़ती गई और कई प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए. दिन की शुरुआत भी बाजार के लिए अच्छी नहीं रही. बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 430 अंकों की कमजोरी के साथ 74,807 पर खुला, जबकि एनएसई का निफ्टी 161 अंक गिरकर 23,482 के स्तर पर कारोबार की शुरुआत करता नजर आया.
इन शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
आज बाजार में मेटल, ऑटो और बड़े दिग्गज शेयरों पर सबसे ज्यादा असर दिखाई दिया. हिंडाल्को, टाटा स्टील, रिलायंस और एम एंड एम के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. निवेशकों ने इन शेयरों में जमकर बिकवाली की, जिससे बाजार का दबाव और बढ़ गया. हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील, रिलायंस इंडस्ट्रीज और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली.
क्यों टूटा शेयर बाजार?
आज बाजार में आई बड़ी गिरावट के पीछे कई अहम कारण सामने आ रहे हैं. सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को माना जा रहा है. ब्रेंट क्रूड की कीमतें 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिसका सीधा असर निवेशकों की सोच और बाजार की चाल पर पड़ा है.
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की वजह से भारतीय मुद्रा पर भी दबाव बढ़ा है. रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.18 के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया है. कमजोर रुपया आयात लागत बढ़ाता है और इससे बाजार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को दी गई नई चेतावनी ने भी वैश्विक निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित किया है. इसके बाद दुनिया भर के बाजारों में सतर्कता बढ़ गई है.
एशियाई बाजारों में भी दिखी कमजोरी
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को एशियाई बाजार भी गिरावट के साथ खुले. ईरान को लेकर बढ़ते तनाव और अमेरिकी बयानबाजी का असर एशियाई बाजारों पर साफ दिखाई दिया. जापान के निक्केई इंडेक्स में करीब 0.2% की गिरावट देखने को मिली. वहीं दक्षिण कोरिया के कोस्पी और कोसडैक इंडेक्स 2 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए. ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 इंडेक्स भी 0.76% नीचे आ गया. हालांकि टॉपिक्स इंडेक्स 0.1% की मामूली बढ़त बनाने में सफल रहा.
अमेरिकी बाजारों से मिले कमजोर संकेत
वैश्विक तेल बाजार में कच्चे तेल की कीमतें दो हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं है. निवेशकों को डर है कि अगर संघर्ष और बढ़ा तो तेल सप्लाई और बुरी तरह प्रभावित हो सकती है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड (Brent Crude oil price) करीब 1.3 प्रतिशत चढ़कर 110.70 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude price) भी 1.7 प्रतिशत की तेजी के साथ 107.26 प्रति बैरल तक जा पहुंचा है.
कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता
ग्लोबल ऑयल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें पिछले दो हफ्तों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं. निवेशकों को डर है कि अगर अंतरराष्ट्रीय संघर्ष और बढ़ता है तो तेल सप्लाई पर गंभीर असर पड़ सकता है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1.3 प्रतिशत बढ़कर 110.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 1.7 प्रतिशत की तेजी के साथ 107.26 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया.
ट्रंप की नई चेतावनी से बढ़ी हलचल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “ईरान के लिए घड़ी टिक-टिक कर रही है. बेहतर होगा कि वे समझौते के लिए तेजी से कदम आगे बढ़ाएं, वरना उनका नामोनिशान नहीं बचेगा. समय बेहद कम है.” वहीं ईरान ने ट्रंप की इस धमकी को खारिज करते हुए कहा कि वह किसी दबाव के आगे नहीं झुकेगा.
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अगर उन पर हमला हुआ तो वे मिडिल-ईस्ट में मौजूद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के ठिकानों को निशाना बनाएंगे. ऐसे हालात में तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है, जिसका असर अब वैश्विक बाजारों से लेकर भारतीय शेयर बाजार तक दिखाई देने लगा है.
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